डिजिटल नज़दीकियां मानवीय दूरियां
लखनऊ तुम्हें गैरों से कब फुर्सत, हम अपने गम से कब खाली” प्रसिद्ध उर्दू शायर मिर्ज़ा जाफ़र अली हसरत (मिर्ज़ा ग़ालिब) का एक बेहद लोकप्रिय शेर है। यह शेर बेवफाई या व्यस्तता के कारण आज के परिप्रेक्ष्य में मानवीय प्यार में दूरी को दर्शाता है।तुम्हें गैरों से कब फुर्सत, हम अपने गम से कब खालीचलो […]
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