पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश का कार्यभार ग्रहण करने के बाद श्री राजीव कृष्ण, आईपीएस द्वारा माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के नेतृत्व एवम् प्राथमिकताओं के अनुरूप पुलिस बल के लिए दस प्रमुख प्राथमिकताएँ निर्धारित की गईं। इन प्राथमिकताओं ने पूरे वर्ष के कार्यों को स्पष्ट दिशा दी और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, जवाबदेह, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आलोच्य वर्ष के दौरान प्राप्त प्रमुख उपलब्धियाँ उन्हीं प्राथमिकताओं के आधार पर प्रस्तुत की जा रही हैं। इसके बाद अन्य उल्लेखनीय उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है।
- अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में उपरोक्त अवधि में अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई और न्यायालयों में मजबूत पैरवी के परिणामस्वरूप ऑपरेशन कन्विक्शन के अंतर्गत 93 प्रतिशत से अधिक दोषसिद्धि दर प्राप्त की गई। कुल 32,071 मामलों में न्यायालयों द्वारा निर्णय दिया गया, जिनमें 29,911 मामलों में दोषसिद्धि हुई। इन मामलों में 42,681 अभियुक्तों को सजा दिलाई गई, जिनमें 18 मृत्युदंड तथा 3,340 आजीवन कारावास की सजाएँ शामिल हैं।
गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 5,684 अपराधियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की गई तथा धारा 14(1) के अंतर्गत लगभग ₹788.38 करोड़ मूल्य की संपत्तियाँ जब्त की गईं।
इस अवधि में प्रमुख अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। लूट के मामलों में 27.8 प्रतिशत, कुल चोरी के मामलों में 14.4 प्रतिशत तथा डकैती के मामलों में 11.1 प्रतिशत की कमी आई। हत्या, बलवा, नकबजनी जैसे अपराधों में भी गिरावट दर्ज की गई।
माफिया एवं संगठित अपराध के विरुद्ध कार्रवाई को लगातार प्रभावी बनाया गया। गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत ₹336 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्तियाँ जब्त, ध्वस्त अथवा अवैध कब्जे से मुक्त कराई गईं। प्रभावी पैरवी के माध्यम से 10 माफिया सरगनाओं और उनके 20 सहयोगियों को सजा दिलाई गई।
- महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा एवं संरक्षण
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश की महिला सुरक्षा के प्रतिबद्धता को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के लिए मिशन शक्ति फेज 5.0 के अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक थाने में मिशन शक्ति केंद्रों को संस्थागत रूप दिया गया। इन केंद्रों का शुभारंभ माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा 20 सितंबर 2025 को किया गया। इसके माध्यम से पूर्व में स्थापित महिला हेल्प डेस्क की भूमिका को और अधिक व्यापक बनाया गया। वर्तमान में 1,647 थानों में महिला हेल्प डेस्क संचालित हैं।
प्रदेश के सभी थानों में मिशन शक्ति केन्द्र स्थापित किए गए हैं, जिनके प्रभावी संचालन हेतु लगभग 13,500 कार्मिकों की नियुक्ति की गई है। महिला सुरक्षा, सम्मान एवं सशक्तिकरण से संबंधित कार्यों के लिए 40,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है तथा IGOT Portal पर भी प्रशिक्षण सामग्री / वीडियो अपलोड किया गया।
मिशन शक्ति केन्द्रों की स्थापना के अत्यंत सार्थक परिणाम प्राप्त हुए हैं। मिशन शक्ति केन्द्र स्थापित होने से तीन माह पूर्व (दिनांकः 16.06.25 से 15.09.25 तक) व स्थापित होने के तीन माह पश्चात (दिनांकः 16.09.25 से 15.12.25 तक) के मध्य पूरे प्रदेश के महिला सम्बंधी अपराधों में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
बलात्कार सम्बंधी प्रकरणों में करीब 33.92 प्रतिशत की कमी हुयी है, महिलाओं एवं बच्चियों के अपहरण सम्बंधी प्रकरणों में करीब 17.03 प्रतिशत की कमी ,दहेज हत्या सम्बंधी प्रकरणों में करीब 12.96 प्रतिशत की, घरेलू हिंसा सम्बंधी प्रकरणों में करीब 9.54 प्रतिशत की कमी आयी है।
- जन शिकायतों का समाधान
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश द्वारा जन शिकायतों के सुचारू निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है। लगातार निगरानी, नियमित समीक्षा और प्रभावी फॉलो-अप के परिणामस्वरूप भारत सरकार के पोर्टल, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन/पोर्टल और IGRS पर प्राप्त शिकायतों एवं लंबित प्रकरणों में सम्मिलित रूप से 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
- कानून-व्यवस्था का प्रभावी संचालन
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश की सुदृढ़ कानून व्यवस्था की प्राथमिकता के दृष्टिगत उपरोक्त अवधि में प्रदेश में सभी प्रमुख आयोजनों को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराया गया। प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 लगभग 22 करोड़ श्रद्धालुओं की उपस्थिति के साथ सकुशल सम्पन्न हुआ। दीपावली, होली, ईद तथा विभिन्न धार्मिक जुलूसों एवं आयोजनों को बिना किसी गंभीर घटना के शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराया गया।
लगातार निगरानी, समयबद्ध समीक्षा और अद्यतन आकस्मिक योजनाओं के कारण पूरी अवधि में प्रदेश में कोई साम्प्रदायिक दंगा नहीं हुआ।
- साइबर अपराध नियंत्रण
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश की प्राथमिकता के अनुरूप साइबर अपराधों पर सख्त नियंत्रण करने हेतु लखनऊ के कल्ली पश्चिम में समर्पित साइबर क्राइम कॉल सेंटर स्थापित किया गया। इसकी क्षमता 20 सीटों से बढ़ाकर 80 सीटों तक की गई है और इसे आगे 200 सीटों तक विस्तारित किए जाने की योजना है।
राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर कुल ₹400.66 करोड़ की धनराशि फ्रीज कराई गई। इसके अतिरिक्त 1.11 लाख मोबाइल नंबर तथा 1.22 लाख IMEI ब्लॉक कराए गए। PRATIBIMB पोर्टल और CIAR अनुपालन में उत्तर प्रदेश ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिसमें CIAR अनुपालन 91 प्रतिशत रहा।
साइबर प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर रहा। I4C CyTrain पोर्टल के माध्यम से 65,608 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया तथा 84,705 प्रमाणपत्र जारी किए गए। प्रत्येक जोन स्तर पर साइबर कमांडो की तैनाती की गई।
साइबर फ्रॉड में धनराशि को तत्काल रोकने के लिए CFMC को संचालित किया गया, जिससे बैंकों के बीच त्वरित lien/freeze कार्रवाई संभव हुई। इसके परिणामस्वरूप साइबर फ्रॉड की धनराशि पर lien प्रतिशत लगभग 18 प्रतिशत से बढ़कर 37 प्रतिशत हो गया।
- पुलिसिंग में तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग
अपराध, अपराधियों और बीट पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए Yaksh App की परिकल्पना की गई। इस ऐप का शुभारंभ माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश द्वारा दिसंबर 2025 में आयोजित Police Manthan के दौरान किया गया।
Yaksh App एक AI-सक्षम प्लेटफॉर्म है, जिसमें facial recognition, voice search, text search, CrimeGPT, gang analysis और beat-level monitoring जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। इस ऐप के माध्यम से फरार अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग, जटिल आपराधिक मामलों के खुलासे, हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी और फील्ड स्तर पर जवाबदेही को मजबूत करने में महत्वपूर्ण सहायता मिली है।
- प्रशिक्षण
उत्तर प्रदेश पुलिस को उत्कृष्ट प्रशिक्षण देने हेतु माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश के प्राथमिकता के अनुरूप उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण ढांचे को आधुनिक, परिणाम-केंद्रित और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाया गया। 60,000 से अधिक नव-आरक्षियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही 9 Training-of-Trainers कार्यक्रमों के माध्यम से 412 master trainers तैयार किए गए।
नई न्याय संहिताओं—BNS, BNSS और BSA—पर 27,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण व्यवस्था में पारंपरिक पुलिसिंग कौशलों के साथ-साथ तकनीक, साइबर अपराध, आर्थिक अपराध, डिजिटल फ्रॉड, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक जांच पद्धतियों को भी शामिल किया गया।
- पुलिस कल्याण
उत्तर प्रदेश पुलिस के कल्याण तंत्र को कई स्तरों पर सुदृढ़ किया गया। Bank of Baroda Police Salary Package के नवीनीकरण के अंतर्गत 76 दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों को कुल ₹137 करोड़ तथा 11 दिव्यांग पुलिसकर्मियों को ₹2.36 करोड़ की सहायता राशि के चेक प्रदान किए गए।
21.03.2026 से प्रभावी नए समझौते के अंतर्गत Personal Accident Insurance की सुविधा को पेंशनरों और पहली बार family pensioners तक बढ़ाया गया। इसमें सेवारत पुलिसकर्मियों के लिए ₹2.30 करोड़ तक, पेंशनरों के लिए ₹85 लाख तक तथा family pensioners के लिए ₹37.5 लाख तक का बीमा कवर उपलब्ध कराया गया।
कल्याण संबंधी बजट में भी वृद्धि की गई। Education Fund को बढ़ाकर ₹75 लाख, Amenities Fund को ₹5 करोड़, Welfare Fund को ₹10 करोड़ तथा Medical Fund को ₹325 करोड़ किया गया।
पुलिसकर्मियों के मेधावी बच्चों के लिए लखनऊ, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद और प्रयागराज में 200 क्षमता वाले छात्रावास प्रस्तावित हैं।
प्रत्येक जनपद, PAC वाहिनी और इकाई में nodal officers के साथ dedicated Police Welfare Cells स्थापित किए गए। Vaama Saarthi के माध्यम से 469 मेधावी बच्चों को सम्मानित किया गया, 1,900 विद्यार्थियों को career counselling दी गई, Vaama Swavalamban के अंतर्गत 18 जनपदों में 1,436 महिलाओं और युवाओं को skill training दी गई तथा मासिक Vama Wellness Camps के माध्यम से पुलिस परिवारों के 51,000 से अधिक सदस्यों को लाभ मिला।
पुलिस मुख्यालय स्तर पर स्वास्थ्य से जुड़े विशेष अभियान भी चलाए गए। Liver cirrhosis screening camp में 757 पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारजनों की जांच की गई। इसके अतिरिक्त प्रदेश स्तर पर रक्तदान अभियान चलाया गया, जिसमें 99 camps के माध्यम से 2,571 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।
- यातायात प्रबंधन
सड़क सुरक्षा एवं Zero Fatality District योजना
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश द्वारा सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और सड़क सुरक्षा पर दिए गए विशेष बल के क्रम में 1 जनवरी 2026 से प्रदेश के सभी 7 पुलिस कमिश्नरेट और 68 जनपदों में Zero Fatality District (ZFD) योजना शुरू की गई। इसके अंतर्गत 487 अत्यधिक दुर्घटना-प्रवण थाना क्षेत्रों को चिन्हित किया गया और आधुनिक enforcement devices से युक्त 573 Crash Control Teams तैनात की गईं।
इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से वर्ष 2026 की प्रथम तिमाही में वर्ष 2025 की तुलना में दुर्घटनाओं में 7.43 प्रतिशत, मृत्यु में 11.55 प्रतिशत और घायलों की संख्या में 8.05 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। 88 monitoring units में से 66 units अर्थात 75 प्रतिशत में सड़क दुर्घटना से होने वाली मौतों में गिरावट आई। प्रथम तिमाही में इस पहल से लगभग 450 सड़क दुर्घटना संबंधी मौतों को रोका गया, अर्थात प्रतिदिन लगभग पांच लोगों की जान बचाई जा सकी। इसी अवधि में 506 दुर्घटनाओं की कमी भी दर्ज की गई।
10 . अन्य प्रमुख उपलब्धियाँ
I. पुलिस मंथन 2025
दिनांक 27 और 28 दिसंबर 2025 को पुलिस मुख्यालय, लखनऊ में दो दिवसीय Senior Police Officers’ Conference Police Manthan 2025 का आयोजन किया गया। इसमें माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी दोनों दिनों तक गरिमामयी उपस्थिति में सम्मिलित रहे। सम्मेलन में 6 प्रमुख उप-विषयों पर 11 structured sessions आयोजित किए गए, जिनमें वरिष्ठ पुलिस नेतृत्व द्वारा रणनीतिक प्राथमिकताओं, संस्थागत सुधारों, तकनीक आधारित पुलिसिंग और नागरिक-केंद्रित सेवा delivery पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
II. ATS/ STF की उपलब्धियाँ
ATS द्वारा आतंकवाद, जासूसी, कट्टरपंथ और अवैध घुसपैठ से जुड़े मामलों में 73 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही सम्भल में नई इकाई तथा Indo-Nepal border और cryptocurrency analysis से संबंधित नई इकाइयों की स्थापना की गई।
आलोच्य अवधि में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) द्वारा संगठित अपराध एवं माफिया तत्वों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही करते हुए प्रदेश सरकार के “माफिया मुक्त उत्तर प्रदेश” अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया गया। इस अवधि में संगठित अपराधियों, मादक पदार्थ तस्करों, प्रतिबंधित वन्यजीव तस्करों, अवैध शस्त्र तस्करों, अवैध शराब तस्करों एवं जाली मुद्रा के कारोबार से जुड़े अपराधियों के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाकर उल्लेखनीय सफलता अर्जित की गई।
आलोच्य अवधि में प्रदेश में आयोजित बोर्ड एवं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को शुचितापूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से सम्पन्न कराए जाने हेतु परीक्षा माफियाओं, सॉल्वर गैंगों एवं पेपर लीक सिंडिकेट्स के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही की गई, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान प्राप्त हुआ।
III. ANTF की कार्रवाई
ANTF द्वारा narcotics, अवैध हथियार और wildlife crime के विरुद्ध बड़ी कार्रवाइयाँ की गईं। ANTF द्वारा लगभग ₹160 करोड़ मूल्य के मादक पदार्थ बरामद किए गए। इसके साथ ही ANTF के 6 नए पुलिस थानों को स्वीकृति प्रदान की गई।
उत्तर प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण हेतु चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन दहन’ अभियान के अंतर्गत अब तक 63,901 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है, जबकि 51,529 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थों का निस्तारण प्रक्रियाधीन है।
IV. Social Media Centre की उपलब्धियाँ
UP Police Social Media Centre द्वारा Meta-enabled action के माध्यम से suicide-related posts पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 1,503 अमूल्य जीवन बचाए गए। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को SKOCH Gold Award 2025 तथा Economic Times GovTech Awards 2026 से सम्मानित किया गया।
इसके अतिरिक्त UP Police Fact Check handle को misinformation के विरुद्ध प्रभावी कार्य के लिए Economic Times GovTech Awards 2026 में Gold Award प्राप्त हुआ।
V. वित्तीय प्रबंधन और भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई
सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन के परिणामस्वरूप बजट उपयोगिता 86.46 प्रतिशत तक पहुंची। Vigilance और Anti-Corruption establishments द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी कार्रवाई की गई तथा trap actions में 100 प्रतिशत सफलता प्राप्त हुई।
इन उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि समीक्षाधीन अवधि में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण, तकनीक आधारित पुलिसिंग, प्रशिक्षण, कल्याण और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में व्यापक और ठोस प्रगति की है।
उत्तर प्रदेश पुलिस हेतु भविष्य का रोडमैप एवं कार्ययोजना –
1- उत्तर प्रदेश पुलिस की भविष्य की कार्ययोजना के अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता — BNS, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता — BNSS तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम — BSA के प्रभावी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है, जिसका मूल उद्देश्य नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी एवं सुगम न्याय उपलब्ध कराना है।
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा नवीन आपराधिक कानूनों के अनुरूप विवेचना की गुणवत्ता में सुधार, प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण तथा 60 से 90 दिनों की निर्धारित टाइमलाइन के अनुपालन पर विशेष बल दिया जाएगा, ताकि पीड़ितों को न्याय की दिशा में अनावश्यक विलम्ब का सामना न करना पड़े।
इसी क्रम में आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक तकनीक-सक्षम, पारदर्शी एवं साक्ष्य-आधारित बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उल्लेखनीय प्रगति की गई है। ई-साक्ष्य के माध्यम से डिजिटल एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन, संरक्षण, प्रमाणीकरण एवं न्यायालय में प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाया जा रहा है। मार्च 2026 तक 10.93 लाख पंजीकृत एफआईआर के सापेक्ष 10.65 लाख डिजिटल साक्ष्य आईडी सृजित की गई हैं तथा 6.07 लाख एफआईआर को उनसे सफलतापूर्वक लिंक किया जा चुका है। इन मामलों में डिजिटल साक्ष्य आईडी कैप्चर सुनिश्चित कर उत्तर प्रदेश पुलिस ने साक्ष्य-आधारित विवेचना, प्रभावी अभियोजन एवं अपराध नियंत्रण के लिए एक सुदृढ़ डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित किया है, जो न्याय वितरण प्रणाली को अधिक दक्ष, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख बना रहा है।
दिनांक 01.12.2024 से 22.05.2026 तक उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कुल 4,96,506 ई-समन का अनुपालन सुनिश्चित किया गया है, जिसकी अनुपालन दर 86.56 प्रतिशत रही है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि तकनीक के प्रयोग, टाइमलाइन के अनुपालन और डिजिटल प्रक्रियाओं के विस्तार के माध्यम से उत्तर प्रदेश पुलिस न्याय प्रणाली को अधिक नागरिक-केंद्रित, समयबद्ध और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में ठोस प्रगति कर रही है।
उत्तर प्रदेश पुलिस का विशेष बल इस बात पर रहेगा कि BNS, BNSS और BSA का क्रियान्वयन केवल विधिक परिवर्तन तक सीमित न रहे, बल्कि यह पीड़ित-केंद्रित पुलिसिंग, गुणवत्तापूर्ण विवेचना, प्रभावी अभियोजन, समयबद्ध न्याय और आम नागरिक के विश्वास को सुदृढ़ करने का माध्यम बने।
2- संगठित अपराधियों, माफियाओं एवं उनसे जुड़े व्हाइट कॉलर अपराधियों के विरुद्ध रणनीतिक, वित्तीय और तकनीक-आधारित कार्यवाही- वर्ष 2017 से माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की अपराध एवं अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के परिणामस्वरूप संगठित अपराध, माफिया तंत्र और उनके आपराधिक नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार हुआ है। इसी नीति को और अधिक प्रभावी बनाते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस की भविष्य की कार्ययोजना के अंतर्गत संगठित अपराधियों, माफियाओं एवं उनसे जुड़े व्हाइट कॉलर अपराधियों के विरुद्ध रणनीतिक, वित्तीय और तकनीक-आधारित कार्रवाई को और सुदृढ़ किया जाएगा। अपराध से अर्जित अवैध संपत्तियों, बेनामी निवेश, शेल कंपनियों, हवाला नेटवर्क, फर्जी लेन-देन और अन्य वित्तीय माध्यमों की गहन जांच कर उनके आर्थिक स्रोतों की पहचान की जाएगी। इसके लिए आर्थिक अपराध शाखा, साइबर क्राइम इकाइयों तथा अन्य विशेषीकृत एजेंसियों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित कर वित्तीय ट्रेल की वैज्ञानिक विवेचना सुनिश्चित की जाएगी, ताकि संगठित अपराध की वित्तीय रीढ़ को तोड़ा जा सके। उत्तर प्रदेश पुलिस का लक्ष्य केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके आर्थिक साम्राज्य, संरक्षक तंत्र और सहयोगी नेटवर्क को विधिक प्रक्रिया के अंतर्गत ध्वस्त कर नागरिकों को भयमुक्त, सुरक्षित और न्यायपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना रहेगा।
उत्तर प्रदेश पुलिस की गत वर्ष की उपलब्धियाँ / भविष्य की योजनाएं-श्री राजीव कृष्ण आईपीएस पुलिस महानिदेश उ.प्र
