आजमगढ़– महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय, आजमगढ़ ने ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और राष्ट्रभक्ति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है। विश्वविद्यालय परिसर में आज उस समय एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब कुलपति प्रो. संजीव कुमार, कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्रा और परीक्षा नियंत्रक सहित विश्वविद्यालय के उच्चाधिकारी अपनी निजी कारों को छोड़कर ई-रिक्शा में सवार होकर कार्यालय पहुँचे। यह केवल एक प्रतीकात्मक यात्रा नहीं, बल्कि देश के आर्थिक स्वावलंबन और ऊर्जा बचत के प्रति एक बड़ा संकल्प है।
प्रधानमंत्री के आह्वान पर विश्वविद्यालय का बड़ा निर्णय


विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऊर्जा की खपत कम करने और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से 18 मई से 23 मई तक परिसर में पेट्रोल और डीजल चालित निजी वाहनों के प्रवेश पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया है। इस अभियान के तहत विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं साइकिल, इलेक्ट्रिक वाहन या सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से परिसर में पहुँच रहे हैं।

इस पहल के केंद्र में रहे कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने एक उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा:”वर्तमान में जिस तरह की अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ बनी हुई हैं, विशेषकर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का प्रभाव न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, बल्कि भारत पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। युद्ध की लंबी अवधि के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से विदेशी वस्तुओं के उपयोग में कमी लाने और पेट्रोल-डीजल की खपत को सीमित करने का जो आह्वान किया है, उसे अपनाना हमारा नैतिक कर्तव्य है।”कुलपति ने आगे कहा, “राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है। एक शिक्षण संस्थान होने के नाते, हमारा यह दायित्व है कि हम अपने विद्यार्थियों को यह सिखाएं कि समाज का प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति यदि थोड़ी-थोड़ी ऊर्जा बचत का संकल्प ले, तो हम देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक आत्मनिर्भर बना सकते हैं। आज ई-रिक्शा से आना मात्र एक सांकेतिक शुरुआत है, हम चाहते हैं कि यह ऊर्जा बचत की संस्कृति पूरे समाज में फैले।


कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्रा ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रतिबंध को लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य ऊर्जा की बर्बादी को रोकना है। हालांकि, प्रशासन ने छात्रों की परीक्षाओं और परिसर की अन्य अनिवार्य आवश्यकताओं के प्रति पूरी संवेदनशीलता बरती है।डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया, “विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों और परीक्षाओं में कोई व्यवधान न आए, इसे ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय की बस सेवाओं और विशेष रूप से माननीय राज्यपाल महोदया द्वारा उपलब्ध कराई गई बस के संचालन को इस प्रतिबंध से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। छात्रों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, यह हमारी प्राथमिकता है।”
विश्वविद्यालय के इस निर्णय की चारों ओर सराहना हो रही है। जानकारों का मानना है कि ऐसे समय में जब देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, विश्वविद्यालय परिसर का ‘नो व्हीकल डे’ (ईंधन रहित दिन) जैसा यह अभियान न केवल ऊर्जा के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है, बल्कि यह विद्यार्थियों के मन में राष्ट्रप्रेम की भावना को भी पुष्ट कर रहा है।
विश्वविद्यालय का यह प्रयास अब अन्य संस्थानों के लिए भी एक मॉडल बनकर उभरा है, जहाँ ‘राष्ट्रहित’ को व्यक्तिगत सुविधा से ऊपर रखकर कार्य किया जा रहा है।

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