लखनऊ सचिवालय के केंद्रीय अनुभाग में बड़ा खेल मुख्यमंत्री के आदेशों की अनदेखी कर बदली गई तैनाती राज्य सचिवालय प्रशासन विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला सचिवालय के केंद्रीय अनुभाग में की गई तैनातियों को लेकर गरमा गया है। आरोप है कि विभाग ने बिना मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री की अनुमति के प्रभारी निजी सचिव और अपर निजी सचिवों को हटाकर उनकी जगह अनु सचिव और समीक्षा अधिकारी की तैनाती कर दी, जबकि इन पदों की केंद्रीय अनुभाग में कोई स्वीकृति ही नहीं है।
जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय अनुभाग पिछले करीब 50 वर्षों से सचिवालय व्यवस्था का अहम हिस्सा रहा है। कुछ समय पहले सचिवालय प्रशासन विभाग की ओर से केंद्रीय अनुभाग को समाप्त करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेजा गया था। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट निर्देश दिए कि केंद्रीय अनुभाग पहले की तरह ही कार्य करता रहेगा।
इसके बावजूद आरोप है कि विभागीय स्तर पर मुख्यमंत्री के आदेशों की अनदेखी करते हुए केंद्रीय अनुभाग की संरचना बदलने की कोशिश की गई। सूत्रों के अनुसार, प्रमुख सचिव के साथ तैनात एक निजी सचिव और सचिवालय प्रशासन विभाग में तैनात एक अनु सचिव की सलाह पर यह पूरा निर्णय लिया गया।
बताया जा रहा है कि मुख्य सचिव को भी इस कार्रवाई की पूरी जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद प्रभारी के पद पर कार्यरत निजी सचिव और अपर निजी सचिवों को हटाकर अनु सचिव को प्रभारी बना दिया गया, साथ ही एक समीक्षा अधिकारी की भी तैनाती कर दी गई।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन पदों पर अधिकारियों को तैनात किया गया है, वे केंद्रीय अनुभाग में स्वीकृत ही नहीं हैं। ऐसे में विभागीय नियमों और प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सचिवालय के अंदर इस फैसले को लेकर भारी नाराजगी बताई जा रही है। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चर्चा है कि यह पूरा मामला केवल तैनाती और पदस्थापन में मनमानी तथा उगाही से जुड़ा हुआ है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि निजी सचिवों और अपर निजी सचिवों की तैनाती में हस्तक्षेप करने के उद्देश्य से यह पूरा खेल किया गया।
अब इस पूरे मामले को लेकर शासन स्तर पर जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को बड़ा प्रशासनिक विवाद बता रहे हैं। वहीं, सचिवालय प्रशासन विभाग की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

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