लखनऊ की CBI कोर्ट (वेस्ट) ने CRPF कांस्टेबल भर्ती घोटाले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व DIG विनोद कुमार शर्मा समेत तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। शनिवार को अदालत ने सभी को तीन साल के कठोर कारावास और कुल 1.20 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
करीब डेढ़ दशक यानी 15 साल तक चले इस मामले में आखिरकार अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। कोर्ट ने माना कि आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार किया!!*

भर्ती में घूसखोरी का मामला, तीनों दोषी करार

CBI ने दर्ज इस मामले में पूर्व DIG विनोद कुमार शर्मा के साथ CRPF के दो कर्मी सत्यवीर सिंह और तीरथ पाल चतुर्वेदी को दोषी पाया गया। अदालत ने सुनवाई के बाद तीनों को कठोर कारावास की सजा सुनाई!!

यह मामला CRPF में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) भर्ती के दौरान घूसखोरी और अनियमितताओं से जुड़ा हुआ था, जिसमें चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगे थे!!

2009 में दर्ज हुआ था केस, सोर्स इनपुट से खुलासा

CBI ने इस मामले को 23 फरवरी 2009 को सोर्स इनपुट के आधार पर दर्ज किया था। जांच के दौरान सामने आया कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा रहा था!!

जांच एजेंसी ने पाया कि आरोपी अधिकारियों ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर एक साजिश रची थी, जिसके तहत भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से पैसे लिए जा रहे थे

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