मुम्बई हाईकोर्ट ने कहा निजी संस्थानों पर ही क्यों ,सरकारी पर कार्रवाई क्यों नही तो FDA ने हाईकोर्ट की ही कैंटीन पर मार दिया छापा
मुम्बई।महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS तुकाराम मुंडे वर्तमान में आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पद पर तैनात हैं और इन दिनों काफी चर्चा में हैं । करीब 21 साल की सेवा में इनका 25 बार तबादला हो चुका है।इसी साल मई 2026 में वे महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आयुक्त बने तो राज्य भर में मिलावट खोरो की शामत आ गयी।दूध-पनीर में मिलावट, होटल-क्लब-कैंटीन की स्वच्छता, जंक फूड पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर राज्यभर छापे शुरू हो गये। BMC मुख्यालय की कैंटीन , क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया की कैंटीन, शहरों के प्रसिद्ध रेस्तरां और दूध डेयरियों पर कार्रवाई की गई। कुछ मामलों में हाइ कोर्ट ने लाइसेंस बहाल भी कराए। जुलाई 2026 के अंत में बॉम्बे हाईकोर्ट में एक निजी होटल के FSSAI लाइसेंस निलंबन की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड़ की बेंच ने FDA की कार्रवाई पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि कार्रवाई सिर्फ निजी होटलों-रेस्तरां पर क्यों हो रही है? सरकारी, अर्ध-सरकारी, मंत्रालय, विधान भवन आदि परिसर की कैंटीनों की जांच क्यों नहीं? “कानून सबके लिए बराबर है। सिर्फ प्राइवेट को निशाना मत बनाओ।” कोर्ट के इस आदेश के बाद इस अफसर ने हाईकोर्ट के अंदर संचालित तीन कैंटीन पर छापा मार दिया । जहां तीन में से दो कैंटीन में नाली में गंदगी, कॉकरोच,कीड़े मिले।हाईकोर्ट की एक कैंटीन तो बिना वैध FSSAI लाइसेंस के चलती पाई गयी। इस कार्रवाई से हाईकोर्ट खुद सकते में आ गया । FDA ने हाईकोर्ट की दो कैंटीन तत्काल बंद करने का आदेश दिया है।
