लखनऊ| सड़कों पर सचिवालय और शासन के नाम पर रौब टैक्सी गाड़ियां बनीं वीआईपी ट्रैफिक पुलिस ने मूंदी आंखें राजधानी लखनऊ की सड़कों पर इन दिनों एक नया और हैरान करने वाला ट्रेंड देखने को मिल रहा है।व्यावसायिक नंबर प्लेट वाली टैक्सी गाड़ियां और निजी वाहन धड़ल्ले से उत्तर प्रदेश सचिवालय और उ०प्र० शासन लिखवाकर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।कानून को ठेंगे पर रखकर निजी स्वार्थ और रौब झाड़ने के लिए सरकारी पदनामों का यह दुरुपयोग खुलेआम हो रहा है लेकिन लखनऊ ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग ने जैसे इस पर अपनी आंखें बंद कर रखी हैं।टैक्सी नंबर प्लेट पर लिखा है उ०प्र० सचिवालय ताजा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है।

लखनऊ के रजिस्ट्रेशन नंबर UP32UN1692 वाली एक सफेद रंग की मारुति वैगन-आर कार जिसके दरवाजे पर साफ तौर पर भारत टैक्सी का लोगो लगा हुआ है और नंबर प्लेट पीले रंग की (कमर्शियल) है उसके पिछले हिस्से पर बड़े-बड़े अक्षरों में उ०प्र० सचिवालय लिखवाया गया है।यह कोई अकेला मामला नहीं है रोजाना ऐसी सैकड़ों गाड़ियां लखनऊ के हजरतगंज विधानसभा मार्ग चारबाग और वीआईपी इलाकों में घूमती मिल जाएंगी।जानकारों की मानें तो गाड़ियों पर इस तरह ‘शासन’ या सचिवालय लिखवाने के पीछे का मकसद बेहद साफ है कि पुलिस आमतौर पर सचिवालय लिखी गाड़ियों को रोकने या उनका चालान करने से हिचकिचाती है।वीआईपी इलाकों और नो-पार्किंग जोन में गाड़ियां खड़ी करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती।आम जनता और पुलिस पर धौंस जमाने के लिए यह सबसे आसान हथकंडा बन चुका है।बड़ा सवाल यदि कोई अपराधी या असामाजिक तत्व इस तरह सचिवालय का फर्जी बोर्ड या स्टीकर लगाकर किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे देता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?क्या पुलिस किसी बड़ी सुरक्षा चूक का इंतजार कर रही है?

नियम कहते हैं कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत किसी भी निजी या कमर्शियल वाहन पर इस तरह के अनधिकृत सरकारी पदनाम विभाग का नाम या उत्तर प्रदेश शासन लिखना पूरी तरह से गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है। नियमों के मुताबिक केवल अधिकृत सरकारी वाहनों या शासन द्वारा अनुबंधित वाहनों पर ही एक निश्चित प्रारूप में पदनाम लिखा जा सकता है, वह भी बेहद कड़े नियमों के साथ कमर्शियल टैक्सी पर इस तरह का लेखन पूरी तरह अवैध है।

हैरानी की बात यह है कि लखनऊ की जिन सड़कों पर रोजाना वीआईपी मूवमेंट होता है और चप्पे-चप्पे पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी मुस्तैद रहते हैं वहां से ये गाड़ियां बिना किसी डर के कैसे गुजर जाती हैं?रोजाना सैकड़ों गाड़ियां नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई ठोस अभियान या बड़ी कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है।

अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद लखनऊ ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या सचिवालय के नाम पर अवैध रौब झाड़ने का यह खेल इसी तरह बदस्तूर जारी रहेगा।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *