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बरखा ऋतु चल रही है । माैसम रस- रस बरस रहे मेघ की बारिश से सुहाना हो जाता है । भीषण गर्मी के बाद आए इस परिवर्तन से मन उल्लासित हो जाता है।ऐसी परिस्थिति में अवध क्षेत्र में लोकगान कजरी का रस प्र वाहित होने लगता है। हमारी कुकरैल लखनऊ की प्रातः भ्रमण की टीम छूट रही लोक कलाओ को उभारने के लिए प्र यासरत है। इसी कड़ी में गोपियों की ब्रज लीला से सम्बन्धित चीर-हरण पर कजरी प्र स्तुत है।


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