दो पत्नियां,बच्चे और बहन के होते हुए गैरों ने कराया अन्तिम संस्कार।इसी के साथ हम पूछते हैं कि अब कहां हैं संस्कार समाज को ये क्या होता जा रहा है
अगर किसी इंसान को कोई बीमारी हो जाए तो उस इंसान को उसके अपने भी ठुकरा दे रहे हैं बे-सहारा छोड़ दे रहे हैं और तो और उस इंसान के मरने के बाद उसके शरीर का अंतिम संस्कार भी नहीं कर रहे हैं।
केरल के हिंदू बुजुर्ग नारायणन जो पूर्व में आरएसएस कार्यकर्ता रह चुके थे,लंबे समय से ओरल कैंसर से जूझ रहे थे करीब एक महीने पहले उन्हें एक दुकान की वरांडा में कमजोर व भूख से तड़पते हालत में पाया गया नारायणन को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहां उनकी मृत्यु हो गई
मौत की सूचना जब पुलिस ने नारायणन के रिश्तेदारों को शव लेने के लिए सूचित किया तो नारायणन के परिवार वालों ने नारायणन का शव लेने से साफ इनकार कर दिया!
नारायणन की दो पत्निया ,बच्चे और बहन में से कोई भी शव लेने या अंतिम संस्कार करने के लिए आगे नहीं आया कोई हिन्दू संगठन भी आगे नहीं आया ऐसे में स्थानीय मुस्लिम महिला इरफ़ाना इक़बाल ने पहल की उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगो ने मिल कर अंतिम संस्कार किया.
