लखनऊ भारतीय जनता पार्टी लखनऊ महानगर द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती पखवाड़ा के अंतर्गत कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन सहकारिता भवन विधानसभा मार्ग में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. नीरज सिंह, भाजपा लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी क्षेत्रीय महामंत्री नीरज वर्मा विधायक डॉ. नीरज बोरा एवं राजेश्वर सिंह विधान परिषद सदस्य रामचंद्र प्रधान एवं मुकेश शर्मा उपविजेता रजनीश गुप्ता तथा अंजनी श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान सभी अतिथियों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।

भाजपा लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी ने केंद्रीय मंत्री के रूप में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपने राजनीतिक जीवन में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की रक्षा के लिए निर्भीकता के साथ कार्य किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल में रहते हुए भी उन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और राष्ट्रहित के प्रश्न पर पद का त्याग कर दिया। उनका जीवन आज भी प्रत्येक कार्यकर्ता को कर्तव्यनिष्ठा, साहस और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है।

क्षेत्रीय महामंत्री नीरज वर्मा ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि भारतीय जनसंघ की स्थापना केवल एक राजनीतिक दल की स्थापना नहीं थी बल्कि राष्ट्रवादी विचारधारा को संगठित रूप से आगे बढ़ाने का संकल्प था। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने एक ऐसे राजनीतिक विकल्प की नींव रखी, जिसमें भारत की संस्कृति परंपरा स्वाभिमान और लोकतांत्रिक मूल्यों को केंद्र में रखा गया। आज भारतीय जनता पार्टी उसी विचारधारा को जनसेवा और राष्ट्रनिर्माण के माध्यम से आगे बढ़ा रही है।

प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. नीरज सिंह ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान पर विचार रखते हुए कहा कि उनका जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान राष्ट्रीय एकता और मजबूत भारत के निर्माण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की एकता और अखंडता के लिए संघर्ष किया तथा उनके विचारों ने देश की राजनीति को नई दिशा दी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे डॉ. मुखर्जी के विचारों को आत्मसात कर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचें और संगठन को अधिक सशक्त बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्र प्रथम की भावना का जीवंत उदाहरण है। उनका संघर्ष त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

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