लखनऊ किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (KGMU) के इतिहास में पहली बार कुलपति और कुलसचिव (रजिस्ट्रार) के बीच प्रशासनिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। दोनों अधिकारियों के अलग-अलग आदेशों ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
जानकारी के अनुसार, कुलसचिव IAS अर्चना गहरवार ने अवकाश पर जाने से पहले जारी आदेश में कार्यवाहक रजिस्ट्रार के नीतिगत निर्णय लेने के अधिकार सीमित कर दिए थे। इसके बाद कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने उक्त आदेश को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि इसे उनका अनुमोदन प्राप्त नहीं था, इसलिए यह प्रभावी नहीं माना जाएगा।
बताया जा रहा है कि इस प्रशासनिक तनातनी का असर विश्वविद्यालय में लंबे समय से लंबित 332 पदों पर प्रस्तावित जॉइनिंग प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है। चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर पहले से ही असमंजस बना हुआ है और अब दोनों शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेद ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है।
इसी बीच विश्वविद्यालय में टेंडर विवाद से जुड़ी फाइलें भी चर्चाओं के केंद्र में हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर चल रही खींचतान को इन मामलों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
कुलपति द्वारा रजिस्ट्रार का आदेश निरस्त किए जाने के बाद KGMU के प्रशासनिक तंत्र में स्थिति को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन या विश्वविद्यालय प्रशासन इस पूरे विवाद पर आगे क्या रुख अपनाता है।
