निजी क्षेत्र में विकसित भारत का पहला ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने कई टेक्नोलॉजी डेमोनेस्ट्रेशन पेलोड और पोस्टकार्ड्स को लो अर्थ ऑर्बिट को स्थापित कर दिया. इन पोस्टकार्ड्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पोस्ट कार्ड भी है.
विक्रम-1 की विशेष विशेषताएं क्या हैं
विक्रम-1 लॉन्च व्हीकल को पहली बार स्काईरूट एयरोस्पेस ने नवंबर 2025 में दिखाया था. कंपनी के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना ने बीबीसी को बताया कि यह भारत का पहला कमर्शियल लॉन्च व्हीकल है.
उन्होंने कहा, “हमने इस रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम-1 रखा है.”
स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी ने बताया था कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के श्रीहरिकोटा लॉन्च पैड पर 18 जुलाई को सुबह 11:30 बजे इसके लॉन्च के लिए सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं.
इस रॉकेट (लॉन्च व्हीकल) को हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी ने बनाया है.
करीब चार साल पहले इसी कंपनी ने विक्रम-एस नामक एक सबऑर्बिटल रॉकेट का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था.
स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना ने बीबीसी को बताया, “पहले हमने ‘विक्रम-एस’ को ‘मिशन सर्वम’ नाम दिया था. अब हमने ‘विक्रम-1’ के लॉन्च को ‘मिशन आगमन’ नाम दिया है.”
विक्रम-1 की अंतिम पेलोड क्षमता 500 किलोग्राम होगी लेकिन फ़िलहाल हम 350 किलोग्राम के पेलोड के साथ इसे लॉन्च कर रहे हैं.”
उन्होंने बताया कि यह 350 किलोग्राम वजन वाले सैटेलाइट को ‘लो अर्थ ऑर्बिट’ में और 260 किलोग्राम वजन वाले सैटेलाइट को ‘सन सिंक्रोनस ऑर्बिट’ में ले जा सकता है.
ऐसा दावा है कि यह सैटेलाइट को पृथ्वी की सतह से 500 किलोमीटर की ऊंचाई तक अंतरिक्ष में ले जा सकता है.
पवन कुमार चंदना ने कहा, “इस रॉकेट का वजन 40 टन है और यह 20 मीटर यानी लगभग सात मंज़िला इमारत की ऊंचाई के बराबर है. इसकी क्षमता 8 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से सैटेलाइट ले जाने की है.”
स्काईरूट ने बताया कि इस लॉन्च व्हीकल का डायमीटर 1.7 मीटर है और इसकी इसकी थ्रस्ट क्षमता 1200 किलोन्यूटन है. इसका 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन पारंपरिक इंजन से 50 प्रतिशत हल्का है.
वीडियो साभार आकाशवाणी एवं सूचना विभाग
