शिक्षा केवल सर्टिफिकेट उपलब्ध करवाने या, डिग्री हासिल करने का माध्यम नही है।यह मनुष्य को संस्कारित करने, समाज राष्ट्र को गढ़ने का सशक्त माध्यम है, और उसके योजक के रूप में ईश्वर ने जो भूमिका हमारे गुरुजनों,शिक्षकों को दी है, अगर वह अपनी महती जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे तो उसके बेहतरीन परिणाम आएंगे।मैं इस बात पर प्रसन्नता की अनुभूति कर सकता हूँ कि बेसिक, और माध्यमिक शिक्षा विभाग के सभी गुरुजनों ने मेहनत की है, ऑपरेशन कायाकल्प को नई ऊंचाई तक पहुंचाया, हर स्तर पर प्रयास किया।याद रखना ये सौभाग्य सबको प्राप्त नहीं होता है कि देश के भविष्य को गढ़ने का, उसको तराशने का जिम्मेदारी जो ईश्वर ने आपको दी है, उस दायित्व का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करेंगे तो आप लोग का जीवन भी यशस्वी होगा और ये बच्चे जब आगे बढ़ेंगे तो आपको स्मरण करते हुए आपको सदैव सम्मान देंगे।हम लोग आज भी जिन शिक्षकों ने हमें बचपन में पढ़ाया था, मैं कभी मुझसे मिलते हैं तो मैं आज भी उनका पैर छूता हूं। आज भी मैं पैर छूता हूं। मैं ये नहीं बोलता हूं कि मैं संन्यासी हूं, मैं नहीं छूऊंगा।मेरे गुरुजन थे, मैं उनका आज भी सम्मान करता हूं। मैं ये नहीं मानता कि वे मुझे बेसिक शिक्षा में पढ़ाए थे। उन्होंने मुझे अक्षर ज्ञान कराया और इसलिए मैं आज भी उनको सम्मान देता हूं।मैं जब भी जाता हूं, उनको बुलवा करके उनको सम्मान करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं और कभी मेरी मुलाकात होती है तो उनका पूरा आदर भी करता हूं और मुझे लगता है ये संस्कार आपको अपने बच्चों के अंदर भरने पड़ेंगे।
