कारगिल विजय दिवस पर सभी शहीद सैनिकों को युद्ध में अपने शौर्य का प्रदर्शन करने वाले सभी जांबाज सैनिकों को शत शत नमन श्रद्धांजलि आज इनकी जय जय होगी फिर यह दिन आज खत्म हो जाएगा कल सोशल मीडिया में बहुत सारे और मुद्दे आ जाएंगे भड़ैती वाली रील आ जाएंगी हम उसमें उलझ जाएंगे फिर इन्हें कौन याद रखेगा एक सेना का सैनिक बड़ी कठिन यात्रा से बनता है,वो कम उम्र के बच्चे जिनकी मूंछ की रेख भी सही से नहीं आती हैअपने लिए बेहद दुर्गम रास्ता चुनते हैं प्राथमिक विद्यालयो से गाँव कस्बे से हाईस्कूल / इंटर की पढ़ाई साथ मे गाँव मे खेती बारी करते हुए गांव की कच्ची पगडंडियो मे खेत खलिहान मे दौड़ लगाते हुऐ बाग बगीचे के टहनियो से लटक कर कसरत करते हुए ट्रेन की जनरल बोगियो मे खड़े बैठे जैसे तैसे घर से चना चबैना लेके पीठ पर बैग टांगे भर्ती स्थल तक पंहुचता है हजारों लाखों की तादाद मे ग्रामीण कस्बे से निकले इन तमाम युवाओं मे काफी जद्दोजहद से ये युवा सैनिक वर्दी धारी बन पाते हैं फिर घर मे सैनिक के साथ एक रोजगार / कमाऊ होने वाला खुशी का माहौल, छोटा भाई भी अब आगे पढ़ाई कर सकता है मां बाप को आस कि अब केवल खेती ही सहारा नही है भइया का मनी आडर भी आने लगेगा बहन को भी आस कि अब भइया कमाएगा तो दहेज के पैसे होगे तो शादी अच्छी हो जाएगी फिर कथा बाराता और अपने कुल देवी देवताओं को मनौती अनुसार पूजा पसारी करके कोई सिकंदराबाद कोई मद्रास कोई पंजाब या अन्य ट्रेनिंग संस्थानो मे बेहद कच्ची उम्र मे ट्रेनिंग समाज घर से बहुत दूर तमाम उम्मीदो की गठरी बांधे बेहद कड़ी शारीरिक ट्रेनिंग अपनी तमाम जिम्मेदारियों से छोटी लगती है ट्रेनिंग के शुरुआत से ही कच्ची उम्र मे ही घर की जिम्मेदारी उठाने की आदत हो जाती है… पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारी से बंधा वो युवा हमारे आपके भाई बंधुओं और बेटों की ही तरह ही तो है एक गैर फिल्मी किरदार । उससे हम सनी देओल और अक्षय कुमार जैसे फिल्मी कथानक की उम्मीद क्यो करते हैं उसे भी अपने परिवार जन के साथ खुशियाँ मनाने का हक है हमे एक नकारा और दिशा हीन राजनैतिक तंत्र को पोषित करने के लिए उनको उकसाने का हक नहीं है माँ बाप अमीर के हो या गरीब के बच्चों के पालन पोषण का दर्द सभी को है उस दर्द को महसूस करिये आप हाथ मे करोड़ रू का चेक लेके अपने जवान बेटे की जलती चिंता नही देख पाएंगे सैनिक और उनका परिवार बहुत विशेष होता है हमारे आपके बच्चे अगर बाहर है उनका मोबाइल 1 -2 घंटे को स्विच ऑफ हो जाए तो आपका बीपी अप डाउन होने लगता है जिनके बच्चे देश की दुर्गम सरहदों पर है जंहा महीनों महीनों नेटवर्क नहीं आता उनके परिवारों के दिन रात कैसे बीतते हैं इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है हमें यह सब समग्रता में हमेशा याद रखना चाहिए 15 अगस्त 26 जनवरी पर शहर से गांव तक हर संस्थान मे तमाम आयोजन होते हैं उनमें किसी भूतपूर्व सैनिक या शहीद के माता पिता या वीर वधू द्वारा ही झंडारोहण होना चाहिए ये मांग नहीं सामाजिक जिम्मेदारी है….
