लखनऊ 69000 सहायक शिक्षक भर्ती के आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पर धरना प्रदर्शन शुरू किया और प्रदर्शन के दौरान आरक्षण पीड़ित यांची अभ्यर्थियों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह पिछले 6 साल से न्याय ना मिल पाने के कारण परेशान है और वह वर्ष 2020 से हाईकोर्ट सिंगल बेंच में याची बनकर याची लाभ की मांग कर रहे हैं ।
आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों ने लगभग 30 मिनट तक बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास पर धरना प्रदर्शन किया इसके बाद प्रदर्शन कर रहे सभी प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बस में बैठाकर इको गार्डन भेज दिया ।
विभिन्न जिलों से धरना प्रदर्शन में शामिल हुए आरक्षण पीड़ित प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वह प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्रदर्शन करने के लिए आए है तथा 6 साल से हाई कोर्ट सिंगल बेंच में और डबल बेंच से यांची बनते हुए वह सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवादी के रूप में मौजूद है तथा सरकार ने 5 जनवरी 2022 को 19000 आरक्षण घोटाले के सापेक्ष 6800 की एक लिस्ट निकाली लेकिन 13 अगस्त 2024 को इस शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट ही रद्द हो गई तथा अब पिछली सुनवाई 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक हलफनामा देकर 8270 सीट का जिक्र किया जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह से उस हलफनामे तथा 8270 सूची संख्या लिस्ट को नकार दिया ।
पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप का कहना है कि आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों का यह मामला सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल 28 जुलाई के लिए लगा हुआ है अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को सुनवाई होती है या नहीं और वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने पिछली 21 जुलाई की सुनवाई में वादी- प्रतिवादी पक्षकारों की तरफ से एवं सरकार के तरफ से दो -दो पेज का रिटन सबमिशन सोमवार तक सभी के द्वारा कोर्ट में जमा किया जाए और उसमें यह बताया जाए कि वर्ष 2020 से हाई कोर्ट सिंगल बेंच से लेकर डबल बेंच तथा सुप्रीम कोर्ट तक इस केस में अब तक क्या-क्या घटनाक्रम घटित हुआ है ताकि पता चले कि आखिर दोनो पक्ष क्या चाहते हैं और सरकार भी स्पष्ट रूप से यह बताएं कि वह अब इस भर्ती में क्या करना चाहती है ताकि आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों को न्याय मिले जो 6 साल से न्याय मांग रहे हैं ।
पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश महासचिव पुष्पेंद्र सिंह जेलर का कहना है कि अगर उत्तर प्रदेश सरकार चाहती है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट से पूरी तरह से निस्तारित हो तो ऐसी स्थिति में अब सरकार को अपने रिटन सबमिशन तथा एफिडेविट में इस बात का उल्लेख अवश्य करना चाहिए कि वह आरक्षण घोटाले के मामले को आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों के लिए याची लाभ देकर समाप्त करना चाहती है , अगर राज्य सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए जाने वाले रिटन सबमिशन तथा एफिडेविट में याची लाभ का उल्लेख कर दिया जाता है तो यह मामला पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा और आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थी तथा अवैध शिक्षक भी यही चाहते हैं कि यह मामला आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों को याची लाभ देकर समाप्त कर दिया जाए ।
पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा महिला सभा की प्रदेश प्रवक्ता पूनम यादव का स्पष्ट तौर पर कहना है कि इस शिक्षक भर्ती में ओबीसी वर्ग को 27% की जगह 3.86% तथा एससी वर्ग को 21% की जगह सिर्फ 16.2% आरक्षण दिया गया है और इस प्रकार इस भर्ती में बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 तथा आरक्षण नियमावली 1994 का घोर उल्लंघन किया गया है और साथ ही साथ प्रत्येक शिक्षक भर्ती की एक मूल चयन सूची जारी की जाती है जिसमें अभ्यार्थियों के गुणांक, कैटागिरी, सब कैटिगरी आदि को दर्शाया जाता है।
लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा विभाग के प्रदेश स्तरीय अधिकारियों ने इस भर्ती के 6 साल बाद भी इस शिक्षक भर्ती की मूल चयन सूची को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है जो यह स्पष्ट संकेत देता है कि इस भर्ती में व्यापक स्तर पर आरक्षण का घोटाला हुआ है पर यही कारण रहा कि हाई कोर्ट लखनऊ डबल बेंच ने 13 अगस्त 2024 को 69000 सहायक शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को ही रद्द कर दिया ।
इन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि ऐसे अवैध शिक्षक जो पिछले 6 साल से नौकरी कर रहे है अब उन्हें बाहर निकाला जाए बल्कि हम चाहते हैं कि ऐसे आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थी जो वर्ष 2020 से हाई कोर्ट सिंगल बेंच से याची बनकर न्याय मांग रहे हैं तथा वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवादी के रूप में है ऐसे सभी आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों को याची लाभ देकर इस आरक्षण घोटाले के विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाए और यदि शुरू से याची बनकर आरक्षण घोटाले के केस को लड़ रहे आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों को याची लाभ नहीं दिया गया तो यह मामला समाप्त नहीं होगा ।
धरना प्रदर्शन में विक्रम यादव, अमित मौर्य, धनंजय गुप्ता, मोहित, सुरेश, धर्मवीर, शीलू, संजय, कपिल , रोहिताश आदि मौजूद थे ।
