सूत्रों के मुताबिक इस सीक्रेट मीटिंग में उत्तर प्रदेश को लेकर एक ‘त्रिस्तरीय मेगा प्लान’ तैयार किया गया है हाल ही में हुए यूपी कैबिनेट विस्तार के बाद शाह ने सीएम योगी को पूरी तरह ‘फ्री हैंड’ दिया है सपा के ‘पीडीए’ पिछड़ा, दलित अल्पसंख्यक कार्ड को काटने के लिए भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय जैसे हेवीवेट नेताओं और गैर-यादव ओबीसी व दलित चेहरों को जमीन पर बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है. अयोध्या समेत पूरे सूबे में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को समय से पहले पूरा करना और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस की नीति को और आक्रामक बनाया रहा है.

अयोध्या के नतीजों से जो डैमेज हुआ था भाजपा उसे एक बड़े अवसर में बदलने जा रही है अमित शाह की संगठनात्मक क्षमता और सीएम योगी आदित्यनाथ की बेदाग व सख्त छवि का यह कॉम्बिनेशन अखिलेश यादव और राहुल गांधी के गठबंधन के लिए एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार कर रहा है. विपक्ष जहां अभी सीट शेयरिंग और अंदरूनी खींचतान में उलझा है, वहीं भाजपा ने 2027 के लिए अपने सबसे बड़े सूरमाओं को मैदान में उतारकर शंखनाद कर दिया है.
