कलकत्ता उच्च न्यायालय अंडमान और निकोबार की “Great Nicobar Project” को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.

कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की ₹92,000 करोड़ से अधिक की ग्रेट निकोबार मेगा परियोजना (Great Nicobar Project) को चुनौती देने वाली कई जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है. High Court ने वन अधिकार अधिनियम के उल्लंघन के आधार पर “Great Nicobar Project” को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं (PILs) को सुनवाई योग्य माना है.

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की उस आपत्ति को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता का अंडमान से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है. हाईकोर्ट ने कहा कि Andaman and Nicobar Islands की जनजातीय आबादी “अत्यंत संवेदनशील” है और भारी खर्च वाली किसी भी परियोजना को लागू कानूनों के अनुरूप ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी परियोजनाएं न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर नहीं हैं.

कलकत्ता हाईकोर्ट की सर्किट बेंच इस मामले की सुनवाई के लिए 23 जून 2026 की तारीख तय की है. यह याचिका पूर्व IAS अधिकारी मीना गुप्ता द्वारा दायर की गई है, जो भारत सरकार की जनजातीय मामलों और पर्यावरण की सचिव रह चुकी हैं. याचिका में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के कथित उल्लंघन, शोम्पेन जनजाति की सहमति में हेरफेर, और Galathea Bay के संवेदनशील इको-जोन में 160 वर्ग किमी से अधिक वन भूमि के वनीकरण के खिलाफ सवाल उठाए गए हैं.

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