लखनऊ शहीदों की स्मृति से जुड़े काकोरी शहीद स्मारक पर मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन को लेकर चल रही तैयारियों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। हेलीपैड निर्माण के लिए मिट्टी उपलब्ध कराने के नाम पर सरकारी जमीन से बड़े पैमाने पर मिट्टी खोदे जाने और उसका एक हिस्सा निजी प्लॉटों में बेचने का आरोप है। मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था और निर्माण कार्य की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, बाबू त्रिलोकी स्कूल के पीछे कथित तौर पर हेलीपैड निर्माण के लिए मिट्टी की खुदाई कराई गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय जेसीबी और डंपरों के जरिए मिट्टी की ढुलाई की गई। दावा किया जा रहा है कि एक रात में करीब 90 से 100 डंपर मिट्टी निकाली गई, जबकि हेलीपैड स्थल तक महज 25 से 30 गाड़ियां ही पहुंचीं।
बाकी मिट्टी कहां गई?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि हेलीपैड के लिए निकाली गई शेष मिट्टी आखिर कहां गई। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि मिट्टी को आसपास के निजी प्लॉटों में ऊंचे दामों पर गिराया गया। सोशल मीडिया पर निजी जमीनों की ओर मिट्टी ले जाते डंपरों के वीडियो भी वायरल होने का दावा किया जा रहा है। इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि हेलीपैड निर्माण के लिए मिट्टी उपलब्ध कराने की मौखिक अनुमति का हवाला देकर बड़े पैमाने पर खुदाई और मिट्टी की ढुलाई की गई। यदि सरकारी भूमि से मिट्टी निकालने की अनुमति दी गई थी, तो उसकी मात्रा, परिवहन और उपयोग का रिकॉर्ड क्या है—यह जांच का अहम विषय है।
खनन माफिया-ठेकेदार गठजोड़ के आरोप
पूरे मामले में स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर खनन माफिया और ठेकेदार के गठजोड़ के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन द्वारा मौके की पैमाइश, खुदाई की मात्रा, डंपरों की आवाजाही और मिट्टी के वास्तविक उपयोग की जांच कराना जरूरी है।
अब सवाल यह है कि हेलीपैड निर्माण के नाम पर कितनी मिट्टी खोदी गई, कितनी मिट्टी मौके पर पहुंची और बाकी मिट्टी आखिर कहां गई? प्रशासन इन सवालों का जवाब कब देगा?
