भारतीय जनता पार्टी की सरकार में एक अच्छाई है, सच को छुपाती है और झूठ को सामने लाती है, क्योंकि सच से कभी व्यापार नहीं हो सकता, व्यापार हमेशा झूठ से होता है।
ताजा उदाहरण बांकीपुर (पटना) विधानसभा उपचुनाव है, जहाँ बीजेपी हार गई। हार के बाद एक नया बहाना सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने UCG पर रोक लगा रखी है, उसके बावजूद भी केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट गई कि हम इसको वापस लेंगे, क्योंकि सामान्य वर्ग बहुलता वाली विधानसभा सीट पर बीजेपी हार गई।
गुजराती महापुरुषों को उत्तर प्रदेश और बिहार वाले मूर्ख लगते हैं, मूर्ख है नहीं, किसी को छोड़ते नहीं है लेकिन तकनीकी से मार खा जा रहे हैं। बांकीपुर में सबक सिखा दिया।
उत्तर प्रदेश और बिहार वाले सबसे ज्यादा नाराज हैं सरकारी नौकरियों के निजीकरण से। बिहार और उत्तर प्रदेश का पूरा टेंडर का काम गुजरात की कंपनियां कर रही हैं, उत्तर प्रदेश बिहार वालों का हाथ खाली है।
उत्तर प्रदेश और बिहार वालों की हालत चिंताजनक है, उनके पैरों से जमीन खिसक गई है। यूपी बिहार वाले मौका मिलने पर किसी को छोड़ते नहीं, अगर कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं है तो।
महत्वपूर्ण मुद्दे पर भाजपा सरकार नहीं आना चाहती है और नहीं बात करना चाहती है, बीमारी कहां की है और दवा कहां दे रही है, क्योंकि उसको पता है जिस दिन नौकरियों का निजीकरण बंद हो जाएगा, यूपी बिहार को हिस्सेदारी मिलने लगेगी, उस दिन से व्यापार और गुजरात दोनों चौपट हो जाएगा।
क्योंकि भाजपा के कार्यकर्ता भी पार्टी से संतुष्ट नहीं, उनको भी लगता है कि हमें मीठा जहर दिया जा रहा है जिससे हमारी पीढ़ियां दर पीढ़ियां बर्बाद हो जाएंगी। यहां तक की नागपुर का उपदेश भी कार्यकर्ताओं को अच्छा नहीं लगता है। भाजपा के कार्यकर्ता कहने लगते हैं कि नागपुर वाले बिजनेस कर रहे हैं और हमारा परिवार बर्बाद हो रहा है।
