त्रेतायुग में भगवान श्रीराम और संकटमोचन हनुमान जी की पावन लीलाओं से जुड़ा उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले का विजेथुआ धाम ‘ (महावीरन मंदिर) इन दिनों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कादीपुर तहसील में स्थित इस पौराणिक स्थल को अब केंद्र व राज्य सरकार की ‘रामायण सर्किट’ योजना से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है।
धाम को भव्य रूप देने के लिए कॉरिडोर और सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। आइए जानते हैं इस धाम का अनोखा इतिहास, रहस्य और कायाकल्प की पूरी योजना। ‘श्रीरामचरितमानस’ के लंकाकांड में गोस्वामी तुलसीदास जी ने कालनेमि वध और हनुमान जी के विश्राम का वर्णन करते हुए लिखा है:
रावन कहा कालनेमिहि जाई। मुनि बेष धरि कपिहि भरमाई॥
जानेहु कपिहि न होइ बिस्वासा। पठवहु ताहि जहां बहु त्रासा॥
जब मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे, तब वैद्य सुषेन की सलाह पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने हिमालय की ओर उड़े। रावण ने बाधा डालने के लिए मायावी राक्षस कालनेमि को भेजा। तब रावण ने राक्षस कालनेमि को बुलाकर कहा, “जाओ, ऋषि (मुनि) का वेश धारण करके हनुमान को धोखे में डालो। यदि तुम्हें लगता है कि वह आसानी से विश्वास नहीं करेंगे, तो उन्हें ऐसे स्थान पर भेजो जहां बहुत कष्ट और बाधाएँ मिलें, ताकि वह समय पर संजीवनी न ला सकें।
