लखनऊ –सीएम योगी ने 260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 17 मेधावियों को कुल 20 मेडल 11 गोल्ड पांच सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल देकर सम्मानित किया।
लखनऊ के आशियाना स्थित डॉक्टर राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे हैं। वही समारोह सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और विश्वविद्यालय के विजिटर जस्टिस विक्रम नाथ, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण भंसाली और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय सहित 260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों मौजूद रहे 260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गई वहीं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 17 मेधावियों को कुल 20 मेडल से सम्मानित 11 गोल्ड पांच सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। गोल्ड मेडल पाने वालों में आठ छात्राएं और तीन छात्र है सीएम योगी आदित्य नाथ ने 260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को डिग्री दी।
सीएम योगी ने कहा अगर हम मान लें,हमारा केस नम्बर 2047 है,सब्जेक्ट विकसित भारत है,इसके याची 140 करोड़ भारतवासी हैं,इन याचियों के अधिवक्ता के रूप में अगर आपको दलील बढ़ाना हो तो क्या स्थिति होगी आपकी आपके मन मे प्रश्न हो रहे होंगे कि विकास के किये दलील, और वकील विकसित भारत की जब हम बात करते हैं तो याद रखना,कि 140 करोड़ का दावा और हर दावे को तथ्य, साक्ष्य,तर्क और ईमानदार वकील चाहिए यह वही उत्तर प्रदेश है,जिस उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय ने 12 जून को भारत के सबसे ताकतवर कुर्सी पर बैठे व्यक्ति के चुनाव को रद्द कर दिया था इसके ठीक 13 दिन बाद प्रतिक्रिया में देश मे आपातकाल लागू हुआ।इतिहास कैसे करवट लेता है,मैं देख रहा था,उस समय जिस जस्टिस हंसराज खन्ना ने असहमति दी थी, उन्हें उसकी कीमत चुकानी पड़ी थी,लेकिन इतिहास व्यर्थ नही जाता हाल ही में आपने देखा होगा कि 2017 में उच्चतम न्यायालय ने उसी असहमति को सही माना 1975 ने देश को सिखाया “रूल ऑफ लॉ,और रूलर ऑफ लॉ ” में क्या फर्क होता है, ये 1975 का सबक है देश के लिए 2017 में फिर से असहमति को सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जस्टिस खन्ना सही थे
पहले यूपी में “रूल ऑफ माफिया” था हमने लॉ की किताब से उसे बाहर निकाल कर प्रदेश में “रूल ऑफ लॉ” का शासन ईमानदारी से लागू किया तब हम यह परिवर्तन लाने में सफल हुए।
प्रयागराज में एक माफिया था,वो जिस जमीन पर पैर रख देता था,वह जमीन उसकी होती थी, उस पर कोई कानून नही लागू होता था कोई मुख्यमंत्री, गवर्नर,हाईकोर्ट जस्टिस जाते थे तो उस माफिया के लिए इनके काफिले रुक जाते थे,पहले उस माफिया को पास कराया जाता था उस “रूल ऑफ माफिया” से यूपी मुक्त हुआ है रूल ऑफ लॉ” सही मायने में यूपी में लागू हुआ है, “रूल ऑफ लॉ” यूपी को बीमारू राज्य से उभरकर भारत के टॉप 3 इकोनॉमी में खड़े हैं।

