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केरल के त्रिशूर में आरएसएस के शताब्दी वर्ष जनसंपर्क कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ का मुख्य उद्देश्य समाज को संगठित कर राष्ट्र के पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस की स्थापना किसी समुदाय के विरोध, राजनीतिक सत्ता हासिल करने या लोकप्रियता पाने के लिए नहीं की गई थी, बल्कि देश के व्यापक हित और कल्याण के लिए की गई थी। भागवत ने कहा कि संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार का मानना था कि भारत बार-बार विदेशी शक्तियों के अधीन इसलिए हुआ क्योंकि समाज के भीतर विभाजन और कमजोरियां थीं। उन्होंने कहा कि एक मजबूत, संगठित और अनुशासित समाज ही देश की समस्याओं का स्थायी समाधान दे सकता है। इसलिए समाज को एकजुट करना और विविधताओं के बावजूद लोगों को आपस में जोड़ना संघ का मूल उद्देश्य रहा है।

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