महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय में BFA छात्रों हेतु विशेष व्याख्यान रचनात्मकता और कला के समकालीन आयामों पर जोर

आजमगढ़ 09 अप्रैल 2026, महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय के ललित कला एवं प्रदर्शन कला संकाय में गुरुवार को बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एक विस्तृत एवं ज्ञानवर्धक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रो. सुनीता गुप्ता ने मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता करते हुए विद्यार्थियों को कला के विविध आयामों से परिचित कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गरिमामय अतिथि स्वागत के साथ हुआ। अपने संबोधन में प्रो.सुनीता गुप्ता ने ललित कला के क्षेत्र में अपने दीर्घ अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, चिंतन और समाज के प्रति दृष्टिकोण को विकसित करने का सशक्त साधन है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि एक सफल कलाकार बनने के लिए निरंतर अभ्यास, अनुशासन और गहन अवलोकन अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने आगे बताया कि वर्तमान समय में कला के क्षेत्र में अनेक नए प्रयोग और तकनीकें विकसित हो रही हैं, जिनके साथ तालमेल बैठाना विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है। उन्होंने डिजिटल आर्ट, इंस्टॉलेशन आर्ट, मिक्स्ड मीडिया तथा पारंपरिक कला के समन्वय पर विशेष चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को नए माध्यमों के साथ प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रत्येक कलाकार की अपनी एक विशिष्ट शैली होती है, जिसे पहचानना और विकसित करना ही उसकी असली पहचान बनाता है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने अपने संदेश में कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक व्याख्यान विद्यार्थियों के समग्र विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को न केवल विषय की गहराई समझने का अवसर मिलता है, बल्कि वे विशेषज्ञों के अनुभवों से सीखकर अपने करियर को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने संकाय की इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन निरंतर करते रहने पर बल दिया।
व्याख्यान के दौरान कला की आधारभूत अवधारणाओं, रंग-संयोजन, रचना-प्रक्रिया, संरचना, संतुलन तथा सौंदर्यबोध जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही समकालीन समय में व्यावहारिक कला, चित्रकला एवं मूर्तिकला के बढ़ते महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। प्रो. गुप्ता ने उदाहरणों के माध्यम से यह समझाया कि किस प्रकार कला समाज के बदलते परिदृश्य को प्रतिबिंबित करती है और कलाकार समाज के संवेदनशील दर्पण के रूप में कार्य करता है।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन भी किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने प्रश्न प्रस्तुत किए। प्रो.सुनीता गुप्ता ने उनके प्रश्नों के उत्तर देकर उन्हें मार्गदर्शन प्रदान किया, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ प्राप्त हुई और उनके भीतर नई ऊर्जा का संचार हुआ।इस अवसर पर संकाय के शिक्षक सत्यम त्रिपाठी (कार्यक्रम संयोजक), अजीत कुमार पटेल एवं गुलशन सोनकर (सह संयोजक) सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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