मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ द्वारा साइबर अपराध की प्रभावी रोकथाम एवं साइबर अपराधियों के विरुद्ध कठोर एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने हेतु समय समय पर दिए गए निर्देशों के क्रम में पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश श्री राजीव कृष्ण द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत निर्धारित की गई 10 प्रमुख प्राथमिकताओं में साइबर अपराध नियंत्रण को विशेष स्थान प्रदान किया गया था। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में साइबर पुलिसिंग को सुदृढ़ करने साइबर इकाइयों की क्षमता संवर्द्धन साइबर अभिसूचना आधारित कार्रवाई साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम तथा साइबर अपराध पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की गई है।
इन सतत प्रयासों के फलस्वरूप साइबर अपराध नियंत्रण एवं साइबर पुलिसिंग के विभिन्न मानकों पर उत्तर प्रदेश पुलिस देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान स्थापित करने में सफल रही है।


इसी क्रम में दिनांक 06 जुलाई, 2026 को पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, श्री राजीव कृष्ण द्वारा साइबर अपराध की रोकथाम साइबर अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई तथा साइबर अपराध पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम श्री बी.के. सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक, साइबर क्राइम श्री पवन कुमार प्रदेश के समस्त कमिश्नरेट एवं जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी साइबर अपराध के नोडल अधिकारी साइबर सेल एवं साइबर थानों में कार्यरत पुलिसकर्मी तथा साइबर अपराध मुख्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी सम्मिलित हुए।


बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में साइबर अपराध नियंत्रण तंत्र की समीक्षा करते हुए कमिश्नरेट एवं जनपद स्तर पर साइबर प्रशासन को और अधिक सुदृढ़ बनाना, वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना, साइबर इकाइयों में कार्यरत कार्मिकों की क्षमता का विकास करना तथा साइबर अभिसूचना (Cyber Intelligence) के आधार पर साइबर अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई सुनिश्चित करना था।


बैठक के दौरान दिनांक 01 अप्रैल, 2025 से 30 जून, 2026 की अवधि में साइबर अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में प्रदेश में की गई कार्यवाही की समीक्षा भी की गई। इस अवधि में साइबर अपराध में प्रयुक्त 2,94,024 संदिग्ध मोबाइल नंबरों तथा 1,81,405 मोबाइल उपकरणों (IMEI) को ब्लॉक कराया गया। साथ ही साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में ₹530 करोड़ की धनराशि पर Lien/Hold लगाकर उसे साइबर अपराधियों तक पहुँचने से रोका गया। पुलिस महानिदेशक ने इन उपलब्धियों की सराहना करते हुए निर्देशित किया कि साइबर अपराध की रोकथाम एवं पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के लिए इन प्रयासों को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाया जाए।


बैठक में पुलिस महानिदेशक द्वारा साइबर अपराध पीड़ितों की शिकायतों का त्वरित पारदर्शी एवं प्रभावी पंजीकरण सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। उनके द्वारा निर्देशित किया गया कि तकनीकी अथवा अन्य कारणों से लंबित अथवा अपूर्ण शिकायतों का यथाशीघ्र निस्तारण करते हुए उन्हें ऑनलाइन प्रणाली में समयबद्ध रूप से प्रेषित किया जाए, जिससे साइबर अपराधियों तक धनराशि पहुँचने से पूर्व अधिकतम राशि को सुरक्षित किया जा सके। इस संबंध में सभी कमिश्नरेट एवं जनपदों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधारात्मक निर्देश भी प्रदान किए गए।


साइबर अपराध की प्रभावी रोकथाम के दृष्टिगत संदिग्ध मोबाइल नंबरों एवं मोबाइल उपकरणों को ब्लॉक कराने साइबर वित्तीय अपराधों में प्रयुक्त बैंक खातों की पहचान कर उनके विरुद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए। इन मानकों के आधार पर प्रदेश के सभी कमिश्नरेट एवं जनपदों की समीक्षा करते हुए कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया।


बैठक में साइबर अपराध पीड़ितों की धनराशि शीघ्र वापस दिलाने की व्यवस्था की भी विस्तार से समीक्षा की गयी एवं भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा विकसित मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल MRM (Money Restoration Module) एवं ग्रीवान्स रिड्रेसल मॉड्यूल GRM (Grievance Redressal Module) के बारे में अवगत कराया गया।

MRM (Money Restoration Module) क्या है?

MRM भारत सरकार के CFCFRMS पोर्टल का एक मॉड्यूल है जिसका उद्देश्य साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों को उनकी होल्ड की गई धनराशि वापस दिलाना है।
जब संबंधित बैंक द्वारा पीड़ित का विवरण MRM पोर्टल पर अपडेट किया जाता है तो पीड़ित के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक SMS/लिंक प्राप्त होता है। इस लिंक के माध्यम से पीड़ित Money Restoration Request MRM पोर्टल पर दर्ज करता है। उक्त अनुरोध संबंधित पुलिस इकाई को MRM पोर्टल पर प्राप्त होता है जहाँ जांच एवं सत्यापन के उपरांत नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करते हुए रिपोर्ट/आदेश संबंधित बैंक को प्रेषित किया जाता है। इसके पश्चात् बैंक नियमानुसार पीड़ित के खाते में धनराशि वापस करता है। इस प्रक्रिया में यदि होल्ड धनराशि ₹50,000 से कम की है तो FIR अथवा Court Order की आवश्यकता नहीं होती जबकि ₹50,000 से अधिक की धनराशि की बहाली के लिए FIR दर्ज होना अनिवार्य है।

GRM (Grievance Redressal Module) क्या है?

यदि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की जांच के दौरान किसी निर्दोष व्यक्ति का बैंक खाता होल्ड/फ्रीज हो जाता है तो वह संबंधित बैंक शाखा में प्रार्थना-पत्र देकर GRM पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकता है। बैंक द्वारा Enhanced Due Diligence (EDD) पूर्ण करने के उपरांत शिकायत GRM पोर्टल के माध्यम से संबंधित पुलिस थाना के विवेचक/जांच अधिकारी (IO) को जांच हेतु प्रेषित की जाती है। जांच उपरांत उचित पाये जाने पर खाते से प्रतिबंध हटाने अथवा न हटाने की कार्यवाही की जाती है ।

पुलिस महानिदेशक द्वारा निर्देशित किया गया कि इन सभी सुविधाओं एवं प्रक्रियाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए जिससे अधिकाधिक नागरिक इनका लाभ प्राप्त कर सकें।
बैठक में साइबर अपराध के विरुद्ध कार्यरत पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता में वृद्धि तथा नवीन साइबर अपराध प्रवृत्तियों के अनुरूप क्षमता विकास पर विशेष बल दिया गया। साथ ही आमजन को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित करने के निर्देश भी दिए गए।


पुलिस महानिदेशक ने यह भी निर्देशित किया कि वित्तीय साइबर अपराधों के अतिरिक्त महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले साइबर अपराधों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया जाए। ऐसे अपराधों से संबंधित अभिसूचना का प्रभावी संकलन कर संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के विरुद्ध समन्वित एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


बैठक के दौरान पुलिस महानिदेशक ने साइबर अपराध एवं साइबर अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी समन्वित एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेशभर में 07 दिवसीय विशेष अभियान “ऑपरेशन साइ-वज्र (Cy-Vajra)” संचालित किए जाने के निर्देश दिए।


बैठक के अंत में पुलिस महानिदेशक ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि साइबर अपराध के विरुद्ध प्रदेश में एक समन्वित तकनीक सक्षम एवं पीड़ित केंद्रित कार्यप्रणाली विकसित करते हुए समयबद्ध प्रभावी एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई सुनिश्चित की जाए जिससे नागरिकों का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो तथा साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

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