खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने नकली दवाओं को बाजार में खपाने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो बिना वास्तविक सप्लाई के सिर्फ कागजों पर करोड़ों रुपये का फर्जी कारोबार चला रहा था!
FSDA की जांच में सामने आया कि कई फर्मों के बीच बिना वास्तविक दवा सप्लाई के क्रॉस-बिलिंग की जा रही थी! फर्जी बिल तैयार कर कागजों में दवाओं की खरीद-बिक्री दिखाई जाती थी और बंद पड़ी फर्मों का इस्तेमाल फर्जी लेनदेन के लिए किया जा रहा था! मामले में अमीनाबाद थाने में चार आरोपियों के खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है!
जांच में हेल्थ प्लस के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी और राम फार्मा के संचालक गोविंद शुक्ला की भूमिका सामने आई है! विभाग के मुताबिक, हेल्थ प्लस के पास वैध औषधि लाइसेंस के बिना ही बड़े पैमाने पर दवाओं के भंडारण और लेनदेन का मामला सामने आया है!दोनों फार्म एक ही फ्लोर पर स्थित थी, इनके जरिए अवैध डायवर्जन का खेल चलाया जा रहा था!
इस नेटवर्क में सहारनपुर की पैशंट केयर सर्जिकल हाउस नाम की ऐसी फर्म का भी इस्तेमाल किया गया, जो पिछले दो वर्षों से पूरी तरह बंद थी! विभाग के अनुसार, इसके संचालक ऐजाज अहमद ने बंद फर्म के नाम का इस्तेमाल कागजी रोटेशन और दवाओं की फर्जी खरीद दिखाने के लिए किया था!
जांच में एमके फार्मा के प्रोपराइटर मनीष बाजपेयी की भूमिका भी सामने आई है! विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026 में फर्म ने 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद दिखाई थी! साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से लैपटॉप का पुराना डेटा डिलीट किए जाने की बात भी सामने आई है. जांच के दौरान Zoryl M1, Augmentin और Dexorange Syrup जैसी दवाओं की फर्जी खरीद के बिल दूसरी फर्मों के नाम पर तैयार किए जाने की भी बात सामने आई है! संबंधित निर्माताओं से सत्यापन कराया गया तो उन्होंने इन दवाओं की बिक्री से इनकार किया और संबंधित बैचों को काउंटरफिट बताया!
जांच का सबसे गंभीर पहलू एमके फार्मा से जुड़ा है! विभाग के मुताबिक वहां से Zoryl M1 की करीब 39.20 लाख दवाएं गायब पाई गईं! आशंका है कि इन दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में खपाया गया, जिससे लोगों के स्वास्थ्य और जान-माल पर गंभीर खतरा पैदा हुआ!
यह कार्रवाई अकेली नहीं है! FSDA के अधिकारी ब्रजेश के मुताबिक अमीनाबाद में पहले भी आठ फर्मों और एक सॉफ्टवेयर डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ फर्जी बिलिंग और सॉफ्टवेयर में हेरफेर करके नकली दवाओं को बाजार में खपाने के मामलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है! जुलाई 2026 में अमीनाबाद में रंजीत सिंह जुल्का के अवैध गोदाम से 21 लाख रुपये की नकली दवाएं जब्त की गई थीं. इस मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है!वहीं आलमबाग मेट्रो स्टेशन के पास से 1.6 लाख रुपये की नकली दवाएं जब्त कर दो आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है!
FSDA की कार्रवाई लखनऊ तक सीमित नहीं है. आगरा में विशेष टीमों ने कम्बूटोला, मुबारक महल, शू मार्केट और नवबिया मार्केट समेत कई इलाकों में संदिग्ध फर्मों पर छापेमारी कर, 15 से अधिक संचालकों के खिलाफ नौ एफआईआर दर्ज कराई है! जांच में फर्जी बिलों के आधार पर Torrent Pharma की नकली Chymoral Forte और Aciloc जैसी दवाएं बेचने तथा ESI और सरकारी कोटे की दवाओं की कालाबाजारी का मामला भी सामने आया है!
आगरा में एक अन्य नेटवर्क में सरकारी अस्पताल की दवाओं की री-लेबलिंग का खुलासा हुआ है! विभाग के अनुसार इंसुलिन समेत कई दवाओं से केमिकल मार्क हटाकर उन पर फर्जी लेबल और मनमानी MRP लगाकर खुले बाजार में बेचने का प्रयास किया गया था. इस मामले में युग फार्मा, शारदा फार्मा और आरएमडी फार्मा से जुड़े लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी. एक अन्य मामले में वीए मेडिकोज, रुद्रा और भगवती मेडिकल सिंडिकेट से जुड़े नेटवर्क पर नकली Telma-H और Jardiance जैसी दवाएं बेचने, साक्ष्य छिपाने तथा निरस्त या कागजी फर्मों के जरिए 1.88 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग का आरोप सामने आया है!
FSDA के अनुसार आगरा में अब तक 3.63 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध, नकली और सरकारी दवाएं जब्त की जा चुकी हैं! मई 2026 में ज्योति ड्रग हाउस के अवैध गोदामों से 2.5 करोड़ रुपये की इंसुलिन, वैक्सीन और डिफेंस ESI सप्लाई की दवाएं बिना कोल्ड-चेन के रखी मिली थीं!वहीं श्री मेडिकल एजेंसीज से 50 लाख रुपये की नकली Oxalgin DP जब्त की गई. जून में ब्राइट फार्मा के संचालक के आवास से 5.20 लाख रुपये की जीवनरक्षक और सरकारी दवाओं की अवैध री-लेबलिंग पकड़ी गई! इसके अलावा कई अवैध गोदामों पर छापेमारी में कुल 67 लाख रुपये मूल्य की अवैध दवाएं और फिजिशियन सैंपल जब्त किए गए!
FSDA अब इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए अंतरराज्यीय कड़ियों की जांच कर रहा है! विभाग के अनुसार अमीनाबाद के अवैध गोदाम से बरामद नकली दवाओं का मुख्य स्रोत राजस्थान से जुड़ा मिला है!भूपेंद्र शर्मा और ट्रांसपोर्टर सतेंद्र गुर्जर के खिलाफ भी एफआईआर कराई गई है! उत्तराखंड के देहरादून में कई ब्रांडों की नकली दवाएं बनाने वाली अवैध निर्माण इकाई के खिलाफ भी छापेमारी की गई! विभाग के अनुसार इस मामले में चार आरोपियों राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा, विनय भटनागर, गौरव त्यागी और विनय चंद्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है!
FSDA ने नकली दवाओं के इस अंतरराज्यीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को सतत निगरानी के निर्देश दिए हैं! विभाग के अनुसार स्थानीय थोक फर्मों के लाइसेंस निरस्त करने के साथ-साथ संचालकों और एजेंटों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. नकली दवाओं का खेल सिर्फ नकली पैकेट बनाने तक सीमित नहीं था, बलकि इसके पीछे फर्जी बिलिंग, कागजी खरीद-बिक्री, बंद फर्मों का इस्तेमाल, डेटा मिटाने और अंतरराज्यीय सप्लाई नेटवर्क का पूरा तंत्र खड़ा किया गया था! अब FSDA की कार्रवाई का अगला फोकस इस नेटवर्क के सोर्स और बाजार में पहुंच चुकी दवाओं की पूरी सप्लाई चेन तक पहुंचना है!
