4
9 / 100 SEO Score

अयोध्या एक तरफ जहां वैश्विक पटल पर रामनगरी अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए पहचानी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर पनप रहा भूमाफियाओं का नेटवर्क अयोध्या की साख को बट्टा लगा रहा है। राम मंदिर निर्माण के बाद से ही बाहरी निवेशकों, रसूखदार खरीदारों और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से अयोध्या के प्राचीन मठ-मंदिरों और विवादित जमीनों पर अवैध कब्जे का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है। ताजा मामला अयोध्या के प्रमोद वन क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक गुजराती मंदिर से जुड़ा है, जहां प्रशासन और भूमाफियाओं की साठगांठ के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, प्रमोद वन स्थित गुजराती मंदिर का गाटा संख्या 212 है। आरोप है कि इसके पास ही स्थित गाटा संख्या 211 में कथित तौर पर कूट रचना (Forgery) कर उसे ‘आ’ और ‘ब’ उप-श्रेणियों में विभाजित कर दिया गया। इसके बाद, गाटा संख्या 212 (यानी गुजराती मंदिर) को अवैध रूप से कब्जा करने के टार्गेट के तहत स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल को मैदान में उतार दिया गया, जिसे कथित तौर पर एसडीएम सदर द्वारा आदेशित बताया जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण में एक नया और बेहद चौंकाने वाला खुलासा यह सामने आया है कि आश्रम के ठीक बगल की जमीन दिल्ली के एक बड़े अधिकारी की पत्नी के नाम पर लिखवाई गई थी, जिसके बाद से प्रशासनिक अमले के जरिए इस जमीन पर अवैध पैमाइश और दबाव बनाने का खेल तेजी से शुरू हो गया है।
साधु-संत समाज में इस कार्रवाई को लेकर भारी रोष है। संतों का आरोप है कि जिस भूमि या गाटे पर पहले से स्टे (Stay) प्रभावी हो, वहां नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई करना और दूसरे की आड़ में मंदिर परिसर को निशाना बनाना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
नियमों की उड़ाई गईं धज्जियां
कानून के जानकारों और प्रशासनिक नियमावली के मुताबिक, किसी भी गाटे या जमीन की पैमाइश के लिए यह अनिवार्य है कि:

  • पैमाइश से कम से कम 15 दिन पहले अगल-बगल के गाटा धारकों और आसपास के स्थानीय रहवासियों को नोटिस चस्पा कर सूचित किया जाए।
  • लेखपाल, तहसीलदार और कानूनगो की संयुक्त टीम द्वारा निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जाए।
    लेकिन अयोध्या तहसील के जिम्मेदार अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने सारे मानकों और नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक पैमाइश और कार्रवाई का खेल शुरू कर दिया।
    मंदिर में रह रहे लोगों को मिल रही धमकियां
    विवाद सिर्फ पैमाइश और प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि डराने-धमकाने का दौर भी शुरू हो चुका है। गुजराती मंदिर परिसर में रह रहे लोगों ने अपनी सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि कुछ दिनों से उन्हें लगातार धमकी भरे संदेश मिल रहे हैं और अज्ञात लोग मंदिर परिसर के भीतर आकर खाली करने का दबाव बना रहे हैं।
    संतों की दो टूक चेतावनी और राजनीतिक सुगबुगाहट
    अयोध्या के मठ-मंदिरों पर हो रहे इन अवैध कब्जों और प्रशासनिक पक्षपात से साधु-संत समाज में सरकार के प्रति भी खासा नाराजगी देखने को मिल रही है। संत समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में जल्द निष्पक्ष जांच कर गुजराती मंदिर को न्याय नहीं दिलाया गया, तो वे सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाएंगे। संतों ने यहाँ तक चेताया है कि यदि उनकी सुनवाई नहीं हुई, तो आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों में इसके बड़े राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
    विश्व पटल पर हालिया घटनाओं के बाद अयोध्या की धूमिल हो रही छवि के बीच, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पूरे प्रकरण का कब और कितना सख्त संज्ञान लेते हैं, तथा ऐतिहासिक गुजराती मंदिर और उसमें रहने वाले बेकसूर लोगों को कब तक न्याय मिल पाता है।

डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट प्राप्त जानकारी, स्थानीय सूत्रों और वायरल दावों पर आधारित है। इसमें लगाए गए आरोप प्रशासनिक व्यवस्था, भूमाफियाओं और स्थानीय गतिविधियों से जुड़े हैं। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की छवि को ठेस पहुंचाना नहीं है, बल्कि सार्वजनिक हित और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को सामने लाना है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों या पक्षों का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

youtube placeholder image

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *