रायबरेली जहाँ मासूम की पीठ पर पड़ी हर चोट कागज़ों में दब जाए, वहाँ स्कूल नहीं खौफ का अंधेरा घर कर लेता है। यह खबर सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि उस टूटते भरोसे की चीख है जो माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय शिक्षा व्यवस्था पर करते हैं। लेकिन जब वही स्कूल डर, दर्द और दहशत का अड्डा बन जाए, तो मासूमियत किताबों से पहले जख्मों में बदलने लगती है। वीवीआईपी जनपद के सलोन कोतवाली क्षेत्र के बगहा स्थित न्यू स्टैंडर्ड पब्लिक स्कूल में इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां कक्षा 8 के 13 वर्षीय छात्र मो. फैज को डायरी में अभिभावकों के हस्ताक्षर न होने जैसी मामूली बात पर इस कदर बेरहमी से पीटा गया कि उसकी पीठ की मांस तक फट गई। पीड़ित छात्र की मां अफसाना का आरोप है कि शिक्षक सुशांत ने बच्चे का हाथ पीछे मोड़कर पहले उसे जमीन पर गिराया, फिर लात-घूंसों और थप्पड़ों से तब तक पीटा जब तक वह दर्द से चीखता रहा। हालत इतनी बिगड़ गई कि बच्चा खड़ा भी नहीं हो पा रहा था और उसे लगातार उल्टी व चक्कर आने लगे।परिजनों के अनुसार जब बच्चे को अस्पताल ले जाया गया तो एक्स-रे में गंभीर चोट की पुष्टि हुई और पीठ की मांस फटी हुई पाई गई। यह दृश्य किसी भी मां के लिए दिल को चीर देने वाला था गोद में कराहता बेटा और आंखों में बेबसी लिए टूटी हुई उम्मीदें…..आरोप यह भी है कि घटना के बाद स्कूल प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की और फोन कर पीड़ित परिवार पर थाने में शिकायत न करने का दबाव बनाया। इतना ही नहीं, छात्रा सुमैया खान को भी डराया-धमकाया गया कि यदि उसने घर में कुछ बताया तो उसका भविष्य बर्बाद कर दिया जाएगा।सबसे गंभीर सवाल यह है कि इतनी भयावह घटना के बावजूद खबर लिखे जाने तक न तो आरोपी शिक्षक पर कठोर कार्रवाई हुई है और न ही समुचित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी है। इससे क्षेत्र में आक्रोश और भय दोनों गहराते जा रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्कूल पहले भी विवादों में रहा है और पूर्व में भी छात्रों के साथ अमानवीय व्यवहार के आरोप लग चुके हैं। बावजूद इसके, जिम्मेदार तंत्र की चुप्पी लगातार सवालों के घेरे में है। आज यह मामला सिर्फ एक छात्र की पिटाई का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की असफलता का प्रतीक बन चुका है, जहां मासूमों की चीखें भी अक्सर फाइलों में दबकर रह जाती हैं।
