असम की सबसे बड़ी मीडिया उद्यमी रिनिकी भुइयां सरमा विवादों में क्यों? संपत्ति, कंपनियों और चुनावी हलफनामे को लेकर उठा सवाल
गुवाहाटी असम की प्रमुख मीडिया कंपनी प्राइड ईस्ट एंटरटेनमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा इन दिनों राजनीतिक विवादों के केंद्र में हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनकी संपत्ति, कंपनियों और कारोबारी विस्तार को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
हाल ही में चुनावी माहौल के बीच रिनिकी भुइयां सरमा की कंपनी के बजट और विदेशी निवेश योजनाओं को लेकर विवाद शुरू हुआ। आरोप लगाए गए कि उनकी एक कंपनी का बजट हजारों करोड़ डॉलर तक बताया गया और अमेरिका में होटल खोलने की योजना का दावा किया गया, जिससे राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई।
*कौन हैं रिनिकी भुइयां सरमा?
31 जुलाई 1973 को गुवाहाटी में जन्मीं रिनिकी एक प्रसिद्ध उद्योगपति परिवार से हैं। उन्होंने कॉटन कॉलेज से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की।
स्कूल और कॉलेज के दिनों में वे एक प्रशिक्षित टेनिस खिलाड़ी भी रह चुकी हैं और इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन से प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
*मीडिया और बिज़नेस साम्राज्य :-
रिनिकी की कंपनी प्राइड ईस्ट एंटरटेनमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के तहत कई प्रमुख चैनल संचालित होते हैं, जैसे:
News Live
North East Live
Rang
Ramdhenu
Indradhanu
इसके अलावा वे असमिया अखबार “नियमिया वार्ता” का भी संचालन करती हैं।
*संपत्ति और कंपनियों पर सवाल :-
2026 के चुनावी हलफनामे के अनुसार रिनिकी की कुल संपत्ति करीब 32.79 करोड़ रुपये बताई गई है। 2011 के मुकाबले यह संपत्ति लगभग 1400% बढ़ी है
उनके नाम पर गुवाहाटी में 22,000 वर्ग फीट से अधिक जमीन दर्ज है
उनकी अन्य कंपनियों में शामिल हैं: –
*राधाकृष्ण टी एस्टेट्स LLP
अर्कासिस पब्लिकेशन्स प्रा. लि.
*वसिष्ठ रियल्टर्स प्रा. लि.
*फिफ्थ पिलर मीडिया प्रा. लि.
*एका एस्टेट्स एलएलपी नामक फर्म में भी उनकी साझेदारी सामने आई है।
*विवाद की वजह मुख्य विवाद के कारण:-
*संपत्ति में तेज़ वृद्धि
*मीडिया और अन्य सेक्टर में बड़े निवेश
*विदेशी विस्तार (अमेरिका में होटल योजना) के दावे
विपक्ष इन मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि समर्थक इसे एक सफल उद्यमी की उपलब्धि बता रहे हैं। फिलहाल अब तक “अराजनीतिक” छवि रखने वाली रिनिकी भुइयां सरमा चुनावी माहौल में अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ये विवाद असम की राजनीति पर कितना असर डालते हैं।
