बेसिक शिक्षा विभाग में जबरदस्त घोटाला जिम्मेदार मौन

उत्तर प्रदेश प्रदेश

जौनपुर बेसिक शिक्षा विभाग में जबरदस्त घोटाला जिम्मेदार मौन कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय केजीबीवी में खाद्यान्न आपूर्ति को लेकर सामने आए टेंडर घोटाले ने एक बार फिर प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।अम्बेडकरनगर में 2.66 करोड़ रुपये के टेंडर को गंभीर अनियमितताओं के चलते निरस्त कर दिया गया,वहीं जौनपुर में इसी तरह के आरोपों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुईअम्बेडकरनगर में सख्त कार्रवाई जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच कराई,जिसमें पाया गया कि 2.66 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के सापेक्ष मात्र 22,580 रुपये की बोली लगाकर टेंडर हासिल किया गया।इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए टेंडर को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।साथ ही संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट करने और निविदा प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों व जिला समन्वयक पर कार्रवाई के आदेश भी जारी किए गए।जौनपुर में वही फर्म, लेकिन कार्रवाई नहीं चौंकाने वाली बात यह है कि जिस फर्म ने अम्बेडकरनगर में टेंडर हासिल किया, वही फर्म जौनपुर में भी सक्रिय बताई जा रही है।आरोप है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा गोरखनाथ पटेल एवं आशीष पटेल जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबेडकर नगर के बीच करीबी संबंध हैं,जिसका सोशल मिडिया प्लेट फार्म पर जौनपुर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के फेसबुक पेज पर मिलता है जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।अब सवाल यह है कि जब एक जिले में स्पष्ट अनियमितता पर सख्त कदम उठाया गया, तो जौनपुर में उसी तरह की स्थिति पर प्रशासन मौन क्यों है? जेम पोर्टल की प्रक्रिया पर भी सवाल जेम पोर्टल पर जारी निविदा में नियमों की अनदेखी के आरोप भी सामने आए हैं। 2.66 करोड़ के टेंडर पर जहां लगभग 1.57 लाख रुपये का पोर्टल शुल्क बनता था, वहीं केवल 22,580 रुपये के हिसाब से शुल्क जमा किया गया। इससे न केवल सरकारी प्रक्रिया प्रभावित हुई, बल्कि पोर्टल को भी आर्थिक नुकसान पहुंचा।टेंडर शर्तों में हेरफेर के आरोप

शिकायतकर्ताओं के अनुसार जौनपुर में जारी निविदा जीईएम/2026/बी/7377432) में कई मनमानी शर्तें जोड़ी गईं—
अनुभव की शर्तों को अत्यधिक जटिल बनाया गया वित्तीय क्षमता ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹60 लाख कर दी गई
अतिरिक्त नियम एटीसी जेम गाइडलाइंस के विपरीत जोड़े गए शर्तें इस प्रकार बनाई गईं कि सीमित फर्म ही पात्र रह सकें इन बदलावों से निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने और पहले से तय फर्मों को लाभ पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है।

अम्बेडकरनगर की तर्ज पर क्या जौनपुर प्रशासन भी दोषी फर्म और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा? या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? फिलहाल, पूरे प्रकरण ने “जीरो टॉलरेंस” नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं और आम जनता की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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