लखनऊ में सड़क पर उतरी भाजपा सरकार साध रही नये समीकरण
लखनऊ मंगलवार को जब राजधानी में सुबह के दस बज रहे थे तो एक तरफ तो सूरज अपनी तपिश से सबको झुलसा रहा था तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सर पर भगवा गमछा लपेटे अपने दोनों उपमुख्यमंत्रियों को दायें-बायें रखकर अपने सरकार आवास से जब विधानसभा की ओर बढ़े तो लगा सूरज से ज्यादा तपिश ये कदमताल बढ़ा रही है। हो भी क्यों नहीं लंबे समय बाद ऐसा मौका था जब राजधानीवासियों को यह नजारा देखने को मिला। क्योंकि अपनी ही सरकार पर कोई मुख्यमंत्री सड़क पर चले, यह तो बड़ी बात है ही। मुख्यमंत्री यानि की पूरी सरकार सड़क पर। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जैसे सभी भाजपा शासित राज्य एक दिन का विधानसभा सत्र आयोजित कर नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विरोध जता रहे हैं वैसे उत्तर प्रदेश में भी तो हो ही रहा है, फिर आखिर ऐसा क्यों। कारण खबरनवीस खोज रहे थी! लेकिन जवाब तो बस एक ही था कि इस कदमताल को करके अगर आधी आबादी सध जाये तो बिहार मुख्य विरोधी दल समाजवादी पार्टी के पीडीए की ताकत को कुचला जा सकता है। आधी आबादी की ताकत बीते दिनों पूरे देश ने बिहार में देखी है तो फिर यह आधी आबादी क्यों ने सियासत का केंद्र बने। अब ऐसा मौका बने तो आखिर अखिलेश बाबू कैसे चूक जायें, उन्होंने भी कैमरे साधे और पत्रकारों को बुला कर भाजपा पर हमला बोल दिया। भाजपा के 2०27 में विपक्ष बनने की बात करने लगे। लेकिन, यूपी की राजनीति में पहली बार आधी आबादी का मुद्दा चुनावों से पहले विपक्ष को टेंशन देने वाला तो बन ही गया है।
तमाम समीकरणों को तैयार करने के बीच भाजपा ने विपक्ष पर जिस प्रकार से हमला बोला है, यह रिटर्न अटैक के तौर पर माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव 2०24 के दौरान अखिलेश यादव के नेतृत्व में विपक्ष ने सत्ताधारी एनडीए पर संविधान को खत्म करने और आरक्षण खत्म करने जैसे आरोप लगाए। वहीं, जब महिला आरक्षण के मुद्दे सदन में एनडीए की ओर से उठाया गया, तो विपक्ष ने विरोध कर दिया। अब आरक्षण विरोधी का नैरेटिव विपक्ष के खिलाफ सेट किए जाने तैयारी पूरी है।
नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के साथ ही परिसीमन विधेयक दो-तिहाई बहुमत के अभाव में लोकसभा में गिर गया। संसद के घटनाक्रम को सड़क तक अपने-अपने नैरेटिव को सेट करने की कोशिश शुरू हो गई है। महिला आरक्षण के मसले को भारतीय जनता पार्टी जोर-शोर से उठा रही है। वहीं, विपक्ष परिसीमन के मुद्दे पर घेरने में जुटी है। सदन के बाहर तमाम विपक्षी दल सत्ता पक्ष के आक्रामक रवैये के कारण घिरते दिख रहे हैं। यूपी में करीब 9 सालों से सत्ता में रही भाजपा हमेशा विपक्षी हमलों को बैकफुट पर रहकर अपने तरीके से डिफेंड करने की कोशिश करती रही थी।
लोकसभा चुनाव 2०24 में जातीय गोलबंदी पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए भाजपा को बैकफुट पर धकेला गया। राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा जैसे मुद्दे तक को पीछे रखकर भाजपा अपने मुद्दों को चुनावी मैदान में उठाती रही। विपक्ष ने सत्ता पक्ष को अपने नैरेटिव में ऐसा फंसाया कि 4०० सीटों का दावा करने वाली भाजपा पूर्ण बहुमत भी हासिल नहीं कर पाई। ऐसे में महिला आरक्षण का मुद्दा भाजपा के लिए बहुत बड़ा मौका बनकर आया है।
2०24 में आसमान में उड़ती और 4०० के पार का नारा देती भाजपा यूपी चुनाव 2०27 से पहले जमीन पर दिख रही है। सीएम योगी से लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तक जमीन पर उतरते दिख रहे हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम भले ही केंद्र सरकार की ओर से लाया गया संविधान संशोधन विधेयक था, लेकिन भाजपा को आरक्षण विरोधी करार देने वाले विपक्ष को घेरने के लिए अब पार्टी इसे हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। महिलाओं यानी आधी आबादी के जरिए विपक्ष के जातीय गोलबंदी यानी पीडीए पॉलिटिक्स की काट तैयार करने में जुट गई है।
योगी पिछले दिनों बंगाल के चुनावी मैदान में यूपी के कानून व्यवस्था मॉडल के साथ-साथ महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष के रवैये पर हमला करते दिखे। सीएम योगी ने चुनावी सभाओं में लगातार कहा है कि मां-माटी-मानुष की बात करने वाली ममता बनर्जी ने संसद में ‘मां’ यानी महिला को धोखा दिया। वहीं, लखनऊ की सड़कों पर अपने दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक एवं अन्य मंत्री-नेताओं के साथ उतरकर प्रदेश की राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
यूपी में अगले साल फरवरी-मार्च में चुनावी परीक्षा से भाजपा को गुजरना है। लेकिन, प्रदेश में सपा की राजनीति महिला आरक्षण के मुद्दे से टकराती रही है। अगले साल उत्तर प्रदेश के साथ कई राज्यों में चुनाव होने हैं। लेकिन, सबसे अधिक नजर उत्तर प्रदेश पर ही रहने वाली है। भाजपा ने प्रदेश के महिला वोट बैंक को साधने का पूरा प्रयास किया है। कानून व्यवस्था से लेकर एंटी रोमियो पुलिस और महिला अपराध पर हाफ एनकाउंटर-एनकाउंटर जैसी नीतियों ने महिलाओं के बीच सीएम योगी की लोकप्रियता बढ़ाई है।
सत्ता पक्ष के आक्रामक रुख ने विपक्ष को बैठफुट पर धकेल दिया है। महिलाओं के लोकसभा और विधानसभा में 33 फीसदी सीटों पर आरक्षण के मसले को लेकर जिस प्रकार की राजनीति हो रही है, उससे सीनियर नेताओं की मुश्किलें बढ़ी हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने तो संसद में साफ किया था कि अगर विपक्ष संविधान संशोधन बिल का विरोध करेगा तो फायदा उन्हें हो जाएगा। अब इस फायदे को उठाने के लिए सरकार सड़क पर है। वहीं, अखिलेश यादव इस पूरे मामले को लेकर सफाई दे रहे हैं। सबसे अधिक डर विपक्ष पर आरक्षण विरोधी का ठप्पा लगने का है। यह ठप्पा अब तक कई नेताओं के बयानों के जरिए विपक्ष भाजपा पर लगाती रही थी। अब इसी प्रकार का माहौल भाजपा ने विपक्ष के लिए बना दिया है।

