images 19
10 / 100 SEO Score

देश में डायबिटीज, मोटापा और फिटनेस को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच ‘शुगर-फ्री’ और आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. लेकिन, अगर आप भी रोजाना चाय, कॉफी या अन्य चीजों में इसका इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने कृत्रिम मिठास के इस्तेमाल और उससे जुड़े संभावित स्वास्थ्य खतरों को लेकर दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह मुद्दा आम जनता की सेहत से जुड़ा हुआ है.

याचिका में कहा गया है कि भारत में आर्टिफिशियल स्वीटनर के इस्तेमाल को लेकर मौजूदा नियम पर्याप्त नहीं हैं. अंतरराष्ट्रीय शोधों के अनुसार, इन उत्पादों के लंबे समय तक सेवन से कई गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है, जिनमें शामिल हैं.

कैंसर
मेटाबॉलिक बीमारियां
हृदय रोग
दिमाग पर नकारात्मक असर
आंतों के अच्छे बैक्टीरिया में बदलाव

याचिका में क्या मांग की गई है?

यह महत्वपूर्ण याचिका इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) की ओर से दायर की गई है. याचिका में अदालत से मुख्य रूप से ये मांगें की गई हैं:

चेतावनी: उपभोक्ताओं को पैकेट पर साफ और आसान भाषा में चेतावनी दी जाए, ताकि लोग पूरी जानकारी के आधार पर फैसला ले सकें कि उन्हें इन उत्पादों का इस्तेमाल करना है या नहीं.
स्वतंत्र अध्ययन: भारत की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन कृत्रिम मिठास वाले उत्पादों पर स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन (Scientific Study) कराए जाएं.
सख्त नियम: उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल स्वीटनर के नियमन (Regulation) को और मजबूत किया जाए.
WHO और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट का भी हवाला

ISMA की इस याचिका में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) और संयुक्त विशेषज्ञ समिति की रिपोर्टों का प्रमुखता से हवाला दिया गया है. इन वैश्विक संस्थाओं ने भी आर्टिफिशियल स्वीटनर के लंबे समय तक सेवन से जुड़े स्वास्थ्य प्रभावों पर गहरी चिंता जताई है और आगे वैज्ञानिक जांच की जरूरत पर बल दिया है.

1 7

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *