बृजभूषण के विधायक बेटे प्रतीक भूषण बोले- श्रावस्ती एयरपोर्ट निर्माण में धांधली हुई
CM को लेटर लिखा कहा उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, प्रतीक भूषण ने पत्र में किए कई बड़े खुलासे।
गोंडा सदर से भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने राजकीय निर्माण निगम द्वारा केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत किए गए श्रावस्ती हवाई अड्डे के निर्माण,मरम्मत और नवीनीकरण कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और निर्माण संबंधी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। बीते 7 अक्टूबर को प्रतीक भूषण सिंह ने सीएम योगी आदित्यनाथ को दो पेज का पत्र लिखा है। जिसमें विधायक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विधायक ने पत्र में आईआईटी रुड़की की थर्ड-पार्टी स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट और अपने प्रतिनिधि द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण का हवाला देते हुए घटिया निर्माण, सुरक्षा में चूक और अधिकारियों-ठेकेदारों की मिलीभगत की आशंका जताई है।
सामरिक व पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण है हवाई अड्डा
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में विधायक ने कहा कि श्रावस्ती हवाई अड्डा विश्वप्रसिद्ध बौद्ध तीर्थस्थल और नेपाल सीमा से सटे होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील व महत्वपूर्ण है। देवीपाटन मंडल की जनता के लिए यह एक ऐतिहासिक सौगात है। लेकिन सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध “शून्य सहनशीलता” (जीरो टॉलरेंस) की नीति के विपरीत राजकीय निर्माण निगम द्वारा निर्माण के दौरान यहां बड़े पैमाने पर गुणवत्ता की अनदेखी की गई है। विधायक ने पत्र में बताया कि उनके प्रतिनिधि ने कुछ दिन पूर्व जब स्थल का मुआयना किया तो कई चौंकाने वाली खामियां सामने आईं। पूरे परिसर में जल-निकासी व्यवस्था पूरी तरह ठप है। त्रुटिपूर्ण निर्माण के कारण नालियों की दोनों दीवारें झुककर आपस में मिल गई हैं, जिससे पानी की निकासी बंद है और चारों तरफ ऊंची घास व गंदा पानी भरा हुआ है। भवनों में सीलन, दरारें और उखड़ता प्लास्टर साफ दिखाई दे रहा है। कई जगहों पर सरिए कंक्रीट से बाहर झांक रहे हैं।
IIT रुड़की की ऑडिट रिपोर्ट में बड़े खुलासे
विधायक ने अपनी पत्र में आगे कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान,रुड़की द्वारा कराई गई थर्ड-पार्टी स्ट्रक्चरल ऑडिट (रिपोर्ट दिनांक 17.12.2025) में वर्ष 2019 में निर्मित भवनों में गंभीर त्रुटियां उजागर हुई हैं। अग्निशमन केंद्र व विद्युत उपकेन्द्र में मात्र 6 वर्ष के भीतर ही कार्बोनेशन सरिये तक पहुंच चुका है और उनमें जंग लगना शुरू हो गया है। अग्निशमन केंद्र के कॉलमों में निर्धारित 40 मिमी कंक्रीट आवरण (कवर) की जगह केवल 10 से 15 मिमी ही पाया गया। इसके अलावा स्लैब की कंक्रीट गुणवत्ता भी संदिग्ध है। टर्मिनल और एटीसी (ATC) भवन में हनीकॉम्बिंग,खुले सरियों में जंग और वॉटरप्रूफिंग में दरारों के कारण पानी का रिसाव हो रहा है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि बार-बार मांगे जाने के बावजूद आईआईटी की टीम को स्वीकृत स्ट्रक्चरल ड्राइंग, डिजाइन बेसिस रिपोर्ट और गणना-पत्र उपलब्ध नहीं कराए गए। जो अभिलेख दिए गए, वे निर्मित भवनों से मेल नहीं खा रहे थे, जिससे डिजाइन की मूल जांच ही संभव नहीं हो सकी।
विधायक ने उठाया सवाल किया बिना मानचित्र के ही बन गया एयरपोर्ट
विधायक ने सवाल उठाया कि क्या ये भवन बिना स्वीकृत ड्राइंग के बने और यदि ड्राइंग थी,तो उसे ऑडिट टीम से क्यों छिपाया गया? साथ ही यह भी पूछा कि निरीक्षणकर्ता अभियंताओं ने मानकों के इस खुले उल्लंघन की अनुमति कैसे दी और किस्तों का भुगतान किस आधार पर हुआ। नए निर्माणों (वित्तीय वर्ष 2023-24) की भी चिंताजनक स्थिति बताते हुए विधायक ने पत्र में रेखांकित किया कि जो कार्य ऑडिट के दायरे से बाहर थे और वित्तीय वर्ष 2023-24 में हस्तांतरित हुए हैं, उनकी स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। लगभग 5 किमी लंबी परिधि दीवार (बाउंड्री वॉल) के नीचे से नीलगाय, गाय, सियार आदि जानवर सीधे रनवे क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। इससे ‘वाइल्डलाइफ स्ट्राइक’ और बड़े विमान हादसे की आशंका बनी हुई है। हाल ही में बना वॉच टावर तेज आंधी में क्षतिग्रस्त हो गया,जिसका पुनर्निर्माण कराना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में व्यापक नवीनीकरण के बावजूद टर्मिनल भवन के लगभग सभी कमरों की छतें टपक रही हैं। इनमें सुरक्षा,संचार और निगरानी से जुड़े अतिसंवेदनशील कक्ष भी शामिल हैं, जहां लगे महंगे व महत्वपूर्ण उपकरणों को भारी जोखिम है।
विधायक प्रतीक की सीएम योगी से प्रमुख मांगें
विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने किसी भी संभावित विमान दुर्घटना से पहले कठोर कदम उठाने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री से निम्नलिखित बिंदुओं पर कार्रवाई का आग्रह किया है। कि नागरिक उड्डयन विभाग से इतर अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र तकनीकी-सह-प्रशासनिक समिति बने,जिसमें स्ट्रक्चरल विशेषज्ञ, लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अभियंता और वित्त अधिकारी शामिल हों। समिति 30 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपे। सभी मूल अभिलेखों को तत्काल सुरक्षित किया जाए।मरम्मत से पहले स्थलीय साक्ष्यों का दस्तावेजीकरण हो और कार्यदायी संस्था के अवशेष भुगतान व सिक्योरिटी मनी पर तत्काल रोक लगे। प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर पूरे मामले को विजिलेंस जांच के लिए संदर्भित किया जाए। दोषी अधिकारियों व अभियंताओं के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो तथा दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर वित्तीय क्षति की वसूली की जाए। विमान सुरक्षा के मद्देनजर बाउंड्री वॉल, ड्रेनेज सिस्टम और संवेदनशील कक्षों की कमियों को ठेकेदार के खर्च पर प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराया जाए। विधायक ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में की गई यह कार्रवाई पूरे प्रदेश के लिए नजीर बनेगी और यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि जनता के पैसे से बनने वाले सार्वजनिक ढांचे में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


