निदेशक सूचना के गुस्से से थर्राया सूचना विभाग, कर्मचारियों को दो टूक—“जिस काम की तनख्वाह लेते हैं, वही काम करें”
सूचना विभाग में आज उस वक्त हड़कंप मच गया, जब निदेशक सूचना का गुस्सा कर्मचारियों पर बरसा। साहब ने साफ शब्दों में हिदायत दी कि सरकारी नौकरी सिर्फ हाजिरी लगाने और इधर-उधर घूमने के लिए नहीं है। जिस काम की तनख्वाह मिल रही है, कम से कम वही काम ईमानदारी से किया जाए।
निदेशक सूचना ने कर्मचारियों को दो टूक कहा कि अपनी-अपनी सीट पर बैठें और काम करें। दफ्तर में बिना किसी काम के इधर से उधर घूमते नजर आने की आदत पर भी नाराजगी जताई गई। संदेश साफ था—दफ्तर काम करने की जगह है, घूमने-फिरने और समय काटने की नहीं।
साहब के तेवर देखकर आज उन कर्मचारियों को भी अपनी सीट याद आ गई, जिनकी कुर्सी तो दफ्तर में थी, लेकिन उनका मन और उनकी मौजूदगी अक्सर कहीं और नजर आती थी। गलियारों की चहलकदमी, इधर की बात उधर और काम के बजाय समय काटने की दिनचर्या पर शायद आज कुछ देर के लिए ब्रेक लग गया।
निदेशक की सख्ती के बाद विभाग में चर्चा यही रही कि सरकारी वेतन के साथ सरकारी जिम्मेदारी भी आती है। कुर्सी सिर्फ बैठने के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने के लिए मिलती है। अब देखना यह होगा कि आज की डांट का असर कितने दिन रहता है और कर्मचारी कितने दिन तक अपनी सीट से ही “काम करते हुए” नजर आते हैं।
फिलहाल निदेशक का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—
“तनख्वाह काम की मिलती है, कुर्सी सजाने की नहीं इसलिए सीट पर बैठिए और काम करिए।
