बरेली की स्वास्थ्य सेवाएं जनता के लिए बनी अभिशाप नोटिसबाजी से खेला जा रहा खेल

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बरेली की स्वास्थ्य सेवाएं अब सवालों के घेरे में ही नहीं, बल्कि आम जनता के लिए अभिशाप बनती जा रही हैं। अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों की बढ़ती संख्या, बिना रजिस्ट्रेशन और बिना फायर एनओसी के चल रहे अस्पताल, और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिसबाजी, ये सब मिलकर सिस्टम की पोल खोल रहे हैं।

दरअसल बरेली में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर लगाम लगाना तो दूर, उनकी संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वहीं, बेसमेंट में चल रहे कई अस्पताल और क्लीनिक बिना रजिस्ट्रेशन और बिना फायर एनओसी के खुलेआम संचालित हो रहे हैं, लेकिन विभागीय कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित नजर आ रही है। वहीं इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। हाल के दिनों में तहसील आंवला और तहसील बहेड़ी क्षेत्र में गलत इलाज के दौरान कई मरीजों की मौत के मामले सामने आए, लेकिन हर बार जांच के नाम पर मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना, जिसके तहत पात्र मरीजों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलना है, वह भी बरेली में सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कई ऐसे अस्पताल, जो मानकों को पूरा नहीं करते, उन्हें भी इस योजना के तहत संचालित होने दिया जा रहा है, हाल ही में सनराइज हॉस्पिटल का मामला सामने आया, जहां आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीज से लाखों रुपये वसूले गए। शिकायत के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेने के बजाय ठंडे बस्ते में डाल दिया।

अगर अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों की बात करें तो भोजीपुरा क्षेत्र में प्राइम अल्ट्रासाउंड, जो पंजीकृत नहीं है, उसे दूसरे नाम से संचालित किए जाने के आरोप हैं। वहीं फरीदपुर में सहारा और न्यू बरेली अल्ट्रासाउंड सेंटर भी मानकों को पूरा किए बिना संचालित हो रहे हैं। इन सबके बीच बरेली की स्वास्थ्य सेवाएं अब एक खतरनाक और भयावह रूप लेती नजर आ रही हैं, जहां नियम-कानून ताक पर रख दिए गए हैं और आम जनता की जान से खिलवाड़ हो रहा है।

इस पूरे मामले को पत्रकार द्वारा बरेली मंडल के स्वास्थ्य अधिकारी एडी हेल्थ डॉ. तेजपाल के संज्ञान में लाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तत्काल बरेली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और पूरे प्रकरण पर लिखित जवाब भी तलब किया है। अब देखना यह होगा कि क्या स्वास्थ्य विभाग इस बार वास्तव में कोई सख्त कदम उठाता है या फिर यह मामला भी नोटिस और जांच के बीच दबकर रह जाएगा।

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