उत्तराखंड-भारत सरकार द्वारा प्रत्येक खेत तक सिंचाई की सुविधा पहुँचाने के उद्देश्य से प्रारम्भ की गई प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के क्रियान्वयन में गंभीर वित्तीय, तकनीकी एवं प्रशासनिक अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
अधिकारी नियुक्त किया है।वहीं, जिलाधिकारी देहरादून ने प्रकरण में मजिस्ट्रेटी जाँच के आदेश दिए हैं। जाँच में योजना के अंतर्गत व्यय की गई धनराशि, लाभार्थियों का सत्यापन, सामग्री की गुणवत्ता एवं वास्तविक स्थापना, आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका, भुगतान प्रक्रिया तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही की जाँच किए जाने की अपेक्षा है।
शिकायतकर्ता ने माँग की है कि योजना के वर्षवार एवं जनपदवार व्यय, लाभार्थियों तथा आपूर्तिकर्ताओं का भौतिक सत्यापन कराया जाए। जिन प्रकरणों में सरकारी धन का दुरुपयोग, फर्जी लाभार्थी, अपूर्ण स्थापना, बिना सत्यापन भुगतान अथवा अन्य वित्तीय अनियमितता पाई जाए, उनमें दोषी अधिकारियों एवं आपूर्तिकर्ताओं के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं विधिक कार्रवाई करते हुए सरकारी धन की वसूली की जाए।
शिकायत के अनुसार, योजना के “पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC)” घटक के अंतर्गत उत्तराखण्ड के कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा अब तक लगभग ₹400 करोड़ से अधिक की धनराशि व्यय की जा चुकी है।
यह केन्द्रपोषित योजना 90 प्रतिशत केन्द्रांश तथा 10 प्रतिशत राज्यांश के वित्तीय अनुपात पर संचालित की जा रही है। आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन के दौरान शासनादेशों एवं निर्धारित दिशा-निर्देशों का समुचित अनुपालन नहीं किया गया। तृतीय पक्ष मूल्यांकन, चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑडिट रिपोर्ट, कैग ऑडिट तथा विभागीय आंतरिक ऑडिट में लाभार्थी सत्यापन, सामग्री की आपूर्ति, उपकरणों की स्थापना, प्रशिक्षण, निरीक्षण, अभिलेखों के रख-रखाव और वित्तीय नियंत्रण से संबंधित अनेक कमियाँ सामने आई हैं।
