शहीद का परिवार 23 साल से हक के लिए भटक रहा है.सरकार पूरे देश में शहीद हुए जवानों को कई तरह की तमाम सुविधाएं देने की बात करती है. लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहने वाले शौर्य चक्र विजेता शहीद विवेक सक्सेना का परिवार देश के हुक्मरानों से सपूत की शहादत के बदले मिलने वाले सम्मान के लिए 23 साल बाद भी अधिकारियों और सरकारी विभागों के चक्कर काट रहा है !
दरअसल, लखनऊ के सरोजनीनगर तहसील कार्यालय में शनिवार को एसडीएम अभिषेक सिंह की अध्यक्षता में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन हुआ. इस दौरान फरियादियों की संख्या कम रही, वहीं ज्यादातर अधिकारी गैरहाजिर थे !
समाधान दिवस में दरोगा खेड़ा की कृष्ण लोक कॉलोनी निवासी 80 साल की सावित्री सक्सेना ने न्याय मांगा. वह शौर्य चक्र विजेता शहीद सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना की मां हैं.
उन्होंने सालों से अटके भूमि आवंटन के मामले को लेकर शिकायत की !!
सावित्री सक्सेना अपने बड़े बेटे रंजीत सक्सेना के साथ पहुंची थीं. उन्होंने बताया कि उनके बेटे सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना 8 जनवरी 2003 को मणिपुर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे.
उन्हें शौर्य चक्र और राष्ट्रपति पुलिस पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया था. इसके बाद शहीद के परिवार को जमीन देने का आदेश हुआ था !
बुजुर्ग सावित्री का कहना है कि –
जमीन आवंटन का सरकारी आदेश होने के बावजूद यह मामला सालों से एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर काट रहा है. उन्होंने कई बार आईजीआरएस पर शिकायतें भी कीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
उन्होंने कहा कि वह 80 साल की हो चुकी हैं और अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगा सकतीं.
उन्होंने राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से मिलने का समय दिलाने की मांग की. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो वह शौर्य चक्र की उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी गई सम्मान राशि, शौर्य चक्र और राष्ट्रपति पुलिस पदक को सम्मान के साथ वापस करने की इजाजत चाहती हैं
