लखनऊ-एक तरफ सूबे के मुखिया के विभाग लखनऊ विकास प्राधिकरण में जीरो टालरेंस के दावे उपाध्यक्ष लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माणों क़ो रोकने के लिए किये जा रहे है वही दूसरी ओर उपाध्यक्ष व उनके सिस्टम की कथनी और करनी भ्रष्ट कार्य शैली से परिपूरित है। यह कथन सुत्रानुसार एलडीए प्रवर्तन जोन-4 में J E व AE व जोनल अधिकारी के संरक्षण में आईआईएम रोड पर एस डी पैलेस के बगल में बिल्डर जुबेर खान द्वारा अवैध मार्केट दुकानों का निर्माण हो रहा है। जिससे उच्च अधिकारियों पर सवाल उठ रहे है। करीब 5 हजार वर्गफीट में अवैध मार्केट लगभग तीन माह से बन रही है। सुत्रानुसार सम्बंधित अधिकारियों द्वारा 2 लाख का नजराना बिल्डर से उठाये जाने का मामला सामने आ रहा है। क्या सच हैँ? पर जब मेंन सड़क पर तीन महीने से अवैध निर्माण हो रहा था उस दौरान आधुनिक संसाधनों से लेंस लविप्रा के सम्बंधित अधिकारियों की प्रवर्तन टीम क़ो उक्त अवैध निर्माण की भनक भी नहीं लगी और ज़ब अवैध निर्माण पूर्ण होने क़ो है तब समाचार प्रकाशित होने व शिकायत होने पर आनन फानन में निर्माण रोकने के लिए वाद संख्या 10152 / 2026 के तहत नोटिस कर दिया गया जो भ्रष्ट व लचर सिस्टम का प्रमाण है। यही से होता है अवैध निर्माणों पर भ्रष्टाचार का खुला खेल। नोटिस के बाद उक्त अवैध निर्माण स्थल पर कार्य अनवरत हो रहा है और ज़ब तक इस खेल का दूसरा भाग यानी सीलिंग आदेश जो जानबूझकर भ्रष्ट मिलीभगत के तहत समयान्तराल के मानकों के विपरीत देर से जारी किया जायेगा और तब तक निर्माण पूरा हो जायेगा और भ्रष्ट खेल के तीसरे भग मानकों के विपरीत कम्पाऊडिंग कराकर अवैध निर्माण क़ो वैध करार देकर लविप्रा के भ्रष्ट सिस्टम के तहत इन भ्रष्ट लोक सेवक अधिकारियों द्वारा लोक हित व जनहित के विरुद्ध एक और अवैध निर्माण पूरा करा दिया जायेगा। ऐसा पहली बार नहीं है और न एक जोन का प्रकरण है प्राधिकरण सातों जोनो में भ्रष्ट व लचर सिस्टम का बोल बाला है प्रत्येक प्रवर्तन जोन में नोटिस बाज प्रवर्तन अधिकारियों का बोल बाला है और वृहद स्तर पर सोची समझी भ्रष्ट नीति के तहत अवैध निर्माणों क़ो अंजाम दिया जा रहा हैँ। उक्त प्राधिकरण के प्रवर्तन विभाग के भ्रष्ट सिस्टम की पोल खुल चुकी हैँ कुछ सप्ताह पहले ज़ब बिजलेंस ने उक्त भ्रष्ट सिस्टम के एक अवर अभियंता, सुपरवाइजर व एक बाहरी दलाल व्यक्ति क़ो रेंगे हाथो सात लाख पचास हजार रिश्वत के साथ पकड़ कर जेल भेजा था। मगर बहुत ही बड़ी बिडम्बना है कि प्राधिकरण के इस भ्रष्ट सिस्टम ने अवैध निर्माणों की पूरी जिम्मेदारी शिकायत कर्ताओं पर थोप कर प्राधिकरण के भ्रष्ट सिस्टम क़ो संरक्षण देने का प्रयास किया। गौर करने की बात है कि जो भ्रष्ट सिस्टम अपने संरक्षण में अवैध निर्माण कराता वही जाकर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही करता है तो अवैध निर्माण क़ो इस भ्रष्ट सिस्टम द्वारा समय रहते अवैध निर्माणों पर केवल कागजी कार्यवाही न करके अवैध निर्माणों क़ो होने से पहले रोक कर एक लोक सेवक का लोक हित व जनहित में अपनी जिम्मेदार क्यों नहीं निभाई जाती हैँ ? अब देखना यह है कि प्राधिकरण उपाध्यक्ष प्राथमेश कुमार अवैध निर्माणों पर कड़ी कार्यवाही के साथ अवैध निर्माण क़ो संरक्षण देने वाले भ्रष्ट सिस्टम पर क्या विभागीय कार्यवाही करते है या अपनी मोंन स्वीकृति बरकरार रखते हैं ?
