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अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद में अब तक का सबसे बड़ा और विस्फोटक मोड़ सामने आ गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने विशेष जांच टीम यानी SIT के सामने जो लिखित बयान दर्ज कराया है उसने अयोध्या से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मचा दिया है. चंपत राय ने ट्रस्ट के ही पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की कार्यशैली पर सीधे उंगली उठाई है. SIT को सौंपे गए पत्र में चंपत राय ने सनसनीखेज दावा किया है कि उनकी जानकारी के बिना, उनकी पीठ पीछे बैंक के साथ दानपात्र की गणना को लेकर एक नया दिशा-निर्देश तय कर लिया गया जिस पर उनके हस्ताक्षर तक नहीं थे.

डॉ. अनिल मिश्रा वाले पत्र को मैं स्वीकार नहीं करता- चंपत राय

SIT को दिए जवाब में चंपत राय ने सीधे तौर पर डॉ. अनिल मिश्रा के हस्ताक्षरों वाले एक गोपनीय दस्तावेज को खारिज कर दिया है. चंपत राय ने SIT से कहा ‘आपके रिकॉर्ड में एक कागज है जिसका शीर्षक है ‘गणना प्रक्रिया के लिए संयुक्त रूप से निर्धारित दिशा-निर्देश दिनांकित 6 फरवरी 2025′. इस पत्र पर न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा जी एवं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्र जी के हस्ताक्षर हैं. मैं इस पत्र से कदापि सहमत नहीं हूं और इसे पूरी तरह अस्वीकार करता हूं. मुझे इस दिशा-निर्देश पत्र की जानकारी 13 जून 2026 को अपने अकाउंट ऑफिस से प्राप्त हुई. इस पर मेरे हस्ताक्षर क्यों नहीं कराए गए? यदि मैं अयोध्या में नहीं था तो मेरी प्रतीक्षा की जानी चाहिए थी.’
चंपत राय ने तर्क दिया कि अगस्त 2020 से जून 2026 तक ट्रस्ट के जितने भी अनुबंध (MOU) हुए उन सभी पर केवल उनके और संबंधित दूसरे पक्ष के प्रमुख अधिकारी के ही हस्ताक्षर होते थे, तो इस महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश पत्र से उन्हें दूर क्यों रखा गया?

कुर्सी-मेज पर बैठकर गणना कराने का फैसला चोरी में सहायक बना

चंपत राय ने बैंक के साथ 9 फरवरी 2024 को हुए मूल समझौते (MOU) का हवाला देते हुए सुरक्षा नियमों में घोर लापरवाही की बात कही है. उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रखकर काम किया गया. चंपत राय के मुताबिक, मूल MOU के अनुसार सुरक्षा के सभी पुख्ता उपाय थे. लेकिन बाद में कुर्सी पर बैठकर और मेज पर रखकर नोटों की गणना करने का परामर्श बैंक ने दिया. चंपत राय ने सीधा आरोप लगाया कि बैंक का यही फैसला चोरी में सहायक बना. दुर्घटना (चोरी का खुलासा) सामने आने के बाद उस मेज को तत्काल हटाया गया और जमीन पर बैठकर दोबारा गणना शुरू हुई.

उन्होंने आगे लिखा कि देश के सभी बैंकों में चेस्ट रूम के कड़े नियम होते हैं. चंपत राय ने आरोप लगाया कि गणना कक्ष के अंदर जाते समय और बाहर आते समय विशेष तलाशी और बिना जेब के कपड़े पहनने के नियम का पालन बैंक ने बिल्कुल नहीं कराया. बैंक ने कर्मचारियों को जो कपड़े दिए उनमें जेब मौजूद थी जिससे चोरी आसान हो गई.


हाउसकीपिंग स्टाफ से कराई जा रही थी करोड़ों के चढ़ावे की गिनती
चंपत राय ने अपने बयान में बैंक द्वारा नोटों की गिनती के लिए तैनात किए गए स्टाफ की योग्यता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने लिखा ‘बैंक ने गणना के लिए जिन युवकों का चयन किया उन्हें ‘Housekeeping Staff’ के रूप में रखा गया है. क्या करोड़ों के चढ़ावे की गिनती के लिए यह उचित है? मेरे विचार से कदापि नहीं.’ चंपत राय ने अंत में लिखा कि यह विवादित दिशा-निर्देश पत्र बेहद जल्दबाजी में लिखा गया था और बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को भी शायद इसके बारे में कुछ नहीं पता था.

चंपत राय के इस जवाब के सामने आने के बाद अब राम मंदिर ट्रस्ट के अंदरूनी मतभेद और दरार खुलकर जगजाहिर हो गई है. चंपत राय ने खुद को बेकसूर बताते हुए पूरी गेंद डॉ. अनिल मिश्रा और बैंक अधिकारियों के पाले में डाल दी है. अब देखना यह होगा कि इस सीधे आरोप के बाद एसआईटी डॉ. अनिल मिश्रा और बैंक के मुख्य प्रबंधक से क्या पूछताछ करती है.

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