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लखीमपुर खीरी के 19 साल पुराने दहेज हत्या मामले में कोर्ट ने आरोपियों को बरी करते हुए जब्त किए गए सोने के जेवर वापस करने का आदेश दिया। लेकिन जब जेवर मांगे गए तो पुलिस ने बताया कि बारिश में भीगने से ज्यादातर सोने के जेवर खराब होकर गल गए और जो बचे थे उन्हें बंदर उठा ले गए!

कोर्ट ने इस दलील पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि सोना बारिश में नष्ट नहीं होता। आखिर मालखाने जैसी संवेदनशील जगह का कीमती सामान खुले में बिना निगरानी के कैसे रखा गया?

कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि जेवरों का इस्तेमाल पुलिसकर्मियों ने अपने हित में किया और बाद में रिकॉर्ड में फर्जी कहानी दर्ज कर दी।

करीब 1 करोड़ रुपये कीमत की ज्वेलरी गायब है। कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित पक्ष को क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

अब पीड़ित परिवार हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।

सवाल यह है कि क्या सच में सोना बारिश में गल गया और बंदर करोड़ों के जेवर लेकर भाग गए, या फिर इसके पीछे कोई और कहानी है?

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